भिवंडी। महाराष्ट्र के भिवंडी में पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंक खातों का धोखाधड़ी से इस्तेमाल करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। भोईवाड़ा पुलिस ने मुंबई के गोरेगांव इलाके में छापेमारी कर दस आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 32 मोबाइल फोन, 49 एटीएम कार्ड, 40 सिम कार्ड, चार लैपटॉप, मोबाइल चार्जर और अन्य सामग्री जब्त की गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों को घर बैठे काम करने और कमाई का लालच देकर उनके बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज हासिल करते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े पैसों के लेनदेन में किया जाता था। पुलिस उपायुक्त डॉ. पवन बनसोड ने गुरुवार, 22 अक्टूबर की शाम पत्रकार वार्ता में इस कार्रवाई की जानकारी दी।

मुंबई के गोरेगांव में पुलिस की बड़ी छापेमारी

भिवंडी की भोईवाड़ा पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर मुंबई के गोरेगांव स्थित आरे कॉलोनी क्षेत्र में छापेमारी की।

पुलिस को जानकारी मिली थी कि रॉयल पाम आइलैंड-08 नामक इमारत में संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने संबंधित परिसर में दबिश दी।

छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और लैपटॉप मिले। प्रारंभिक जांच में इन उपकरणों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से संबंधित वित्तीय लेनदेन में किए जाने का संदेह सामने आया।

पुलिस ने मौके से दस लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

वर्क फ्रॉम होम का लालच देकर हासिल किए बैंक खाते

पुलिस जांच के अनुसार, पूरे मामले की शुरुआत 17 अक्टूबर को सामने आई शिकायत से हुई थी।

भगवान दास नामक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने भिवंडी के एक शिकायतकर्ता और उसके सात दोस्तों को घर बैठे काम करने का प्रस्ताव दिया था।

आरोप है कि वर्क फ्रॉम होम के नाम पर इन लोगों से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, चेकबुक और अन्य बैंकिंग विवरण हासिल किए गए।

शुरुआत में शिकायतकर्ताओं को लगा कि उनके बैंक खातों का इस्तेमाल किसी वैध काम के लिए किया जाएगा, लेकिन बाद में उन्हें धोखाधड़ी का संदेह हुआ।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं के भरोसे का फायदा उठाकर उनके खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइटों के जरिए रुपये भेजने और प्राप्त करने में किया।

गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े लेनदेन की जांच

जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ताओं के बैंक खातों का इस्तेमाल कुछ ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से संबंधित आर्थिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

पुलिस को संदेह है कि गिरोह ऐसे खातों के माध्यम से बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान प्राप्त करता था और बाद में रकम को अन्य खातों में स्थानांतरित करता था।

साइबर अपराध की दुनिया में इस प्रकार इस्तेमाल किए जाने वाले खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

ऐसे खातों का इस्तेमाल वास्तविक धन प्राप्त करने वाले व्यक्ति की पहचान छिपाने और रकम को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जा सकता है।

हालांकि, इस मामले में कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ और कितने बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, इसकी जांच जारी है।

छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड के आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिकेत यादव (24), रमेश मंडल (26), खिलेश यादव (24), कुंदन यादव (21), राजाराम राउत (26), आतिश यादव (20), अशोक यादव (28), दिलीप यादव (28), जितेंद्र कुमार यादव (22) और संटू यादव (28) के रूप में हुई है।

इनमें अनिकेत यादव और रमेश मंडल छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए गए हैं।

खिलेश यादव और राजाराम राउत झारखंड से संबंधित हैं, जबकि अन्य छह आरोपी बिहार के निवासी बताए गए हैं।

अलग-अलग राज्यों के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का संचालन अन्य राज्यों तक फैला हुआ था।

26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजे गए आरोपी

गिरफ्तारी के बाद सभी दस आरोपियों को भिवंडी की अदालत में पेश किया गया।

अदालत ने आरोपियों को 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उन्होंने कितने लोगों के बैंक खाते हासिल किए और इन खातों के माध्यम से कितनी रकम का लेनदेन किया गया।

इसके साथ ही गिरोह के संभावित संचालकों और दूसरे सहयोगियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जब्त मोबाइल फोन और लैपटॉप की तकनीकी जांच से महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

इस कार्रवाई को सहायक पुलिस आयुक्त मिलिंद शिंदे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विक्रम मोहिते और पुलिस निरीक्षक दीपक जाधव के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।

सहायक पुलिस निरीक्षक श्रीकांत डांगे और पुलिस उपनिरीक्षक रामदास कोलते के नेतृत्व वाली टीम ने तकनीकी जानकारी के आधार पर संदिग्ध ठिकाने का पता लगाया।

पुलिस उपायुक्त डॉ. पवन बनसोड ने बताया कि मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विक्रम मोहिते कर रहे हैं।

जांच टीम बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

49 एटीएम कार्ड और 40 सिम कार्ड से उठे सवाल

गिरफ्तार आरोपियों के पास इतनी बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड और सिम कार्ड मिलने से पुलिस को आशंका है कि गिरोह कई बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए वित्तीय गतिविधियां संचालित कर रहा था।

जब्त किए गए उपकरणों का परीक्षण करके खातों के वास्तविक मालिकों की पहचान की जाएगी।

इसके अलावा यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कितने लोगों ने स्वेच्छा से अपने खाते उपलब्ध कराए और कितनों से धोखे से दस्तावेज हासिल किए गए।

पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से रुपये के लेनदेन की श्रृंखला को समझने का प्रयास कर रही है।

अंतरराज्यीय नेटवर्क होने की आशंका

गिरफ्तार लोगों के अलग-अलग राज्यों से संबंधित होने के कारण पुलिस इस पूरे मामले में अंतरराज्यीय गिरोह की संभावना की भी जांच कर रही है।

अधिकारियों का प्रयास है कि इस रैकेट के मुख्य संचालकों और बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले लोगों का पता लगाया जाए।

यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों का संबंध अन्य ऑनलाइन गेमिंग या सट्टेबाजी नेटवर्क से तो नहीं है।

हालांकि, जांच पूरी होने से पहले इस गिरोह के किसी बड़े अंतरराज्यीय संगठन से जुड़े होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।

बैंक खातों की जानकारी साझा करने से बचने की अपील

इस मामले ने ऑनलाइन कमाई और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के खतरों को फिर सामने रखा है।

साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से किसी अनजान व्यक्ति को बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल सिम या इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित जानकारी सौंपना जोखिम भरा हो सकता है।

यदि किसी व्यक्ति का बैंक खाता अवैध वित्तीय गतिविधियों में इस्तेमाल होता है, तो उसे भी जांच का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में संदिग्ध आर्थिक लेनदेन की जानकारी तत्काल बैंक और संबंधित साइबर अपराध पुलिस को देना आवश्यक है।

पुलिस को बड़े खुलासे की उम्मीद

फिलहाल भिवंडी पुलिस दस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जांच जारी है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धोखाधड़ी से हासिल किए गए बैंक खातों के माध्यम से कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही।

इस कार्रवाई से ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के लिए बैंक खातों का कथित दुरुपयोग करने वाले नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आया है।

अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए कितने लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

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