किसानों के लिए सड़क पर उतरे विधायक नितिन देशमुख, पुलिस ने लिया हिरासत में
वाशिम। महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक नितिन देशमुख और कई अन्य कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। देशमुख किसानों के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग को लेकर वाशिम जिले में समृद्धि एक्सप्रेसवे की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की योजना वनोजा के पास एक्सप्रेसवे पर 'रास्ता रोको' आंदोलन करने की थी। शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य सरकार की ओर से घोषित राहत राशि को अपर्याप्त बताते हुए सूखा प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई है। इसके साथ ही लंबित फसल बीमा दावों का तत्काल निपटारा करने और कृषि उपज के लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
जानकारी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के नेता और अकोला जिले की बालापुर विधानसभा सीट से विधायक नितिन देशमुख के नेतृत्व में शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान तथा पार्टी कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए।
प्रदर्शनकारियों ने वाशिम जिले के मंगरूलपीर तहसील क्षेत्र में स्थित वनोजा-शेलूबाजार इलाके में समृद्धि महामार्ग पर रास्ता रोकने की योजना बनाई थी। आंदोलन का उद्देश्य राज्य सरकार तक किसानों की मांगों को पहुंचाना था।
शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे किसानों को पर्याप्त सहायता नहीं मिलने की स्थिति में समृद्धि एक्सप्रेसवे पर चक्का जाम करेंगे।
शुक्रवार को जब नितिन देशमुख अपने समर्थकों और किसानों के साथ एक्सप्रेसवे की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें और कई अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया।
आंदोलनकारियों का कहना था कि राज्य में सूखे और फसलों के नुकसान से प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। सरकार द्वारा घोषित राहत उनकी वास्तविक क्षति की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
नितिन देशमुख ने किसानों की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए राज्य सरकार से प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की सहायता देने की मांग की है।
उन्होंने यह भी मांग की कि फसल बीमा कंपनियां किसानों के लंबित दावों का शीघ्र निपटारा करें, ताकि प्रभावित परिवारों को नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके।
इसके अलावा कृषि उपज के लिए लाभकारी कीमतों की मांग भी उठाई गई है। पार्टी का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से उनकी आर्थिक समस्याएं और बढ़ रही हैं।
शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता वास्तविक नुकसान की तुलना में बेहद कम है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, किसानों को केवल अस्थायी सहायता देने के बजाय उनकी फसलों के नुकसान का व्यापक आकलन करके पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए।
विधायक नितिन देशमुख ने आंदोलन से पहले भी स्पष्ट किया था कि पुलिस नोटिस जारी किए जाने के बावजूद किसानों के अधिकारों के लिए प्रस्तावित प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने कहा था कि पार्टी कार्यकर्ता किसानों की मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। देशमुख ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को पुलिस की ओर से नोटिस दिए गए हैं।
पार्टी के नेताओं का कहना है कि पश्चिमी विदर्भ के कई जिलों में किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फसल नुकसान, उत्पादन लागत और कर्ज जैसी समस्याओं ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
ऐसे में किसानों को जल्द राहत उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस आंदोलन को देखते हुए वाशिम जिला प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी कर ली थी। समृद्धि एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
वाशिम की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लता फड़ ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 1,500 पुलिसकर्मी और 150 पुलिस अधिकारी तैनात किए गए थे।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
पुलिस प्रशासन ने आंदोलन में शामिल होने की संभावना वाले विभिन्न कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को नोटिस भी जारी किए थे।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वाशिम जिले में लगभग 400 लोगों को नोटिस दिए गए थे। इनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और एक्सप्रेसवे पर किसी अप्रिय स्थिति को रोकना था।
समृद्धि महामार्ग महाराष्ट्र का महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे है। इस मार्ग पर यातायात बाधित होने से बड़ी संख्या में यात्रियों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
यही कारण है कि पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को एक्सप्रेसवे तक पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की थी।
इस बीच राज्य सरकार ने भी सूखा प्रभावित किसानों को राहत उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को अधिकारियों को निर्देश दिया था कि लगभग 1.5 करोड़ किसानों के बैंक खातों में पांच-पांच हजार रुपये की अग्रिम राहत राशि जमा कराई जाए।
इस सहायता के लिए कुल 7,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि किसानों को मिलने वाली राहत राशि से बैंक किसी प्रकार की कटौती न करें, ताकि किसानों तक पूरी सहायता पहुंच सके।
राज्य सरकार के अनुसार, यह राशि प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कहा था कि किसानों को तत्काल सहायता के अतिरिक्त सूखा घोषित होने की स्थिति में मिलने वाले अन्य निर्धारित लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि वह किसानों की परेशानियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी बताया था कि किसानों से माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा जबरन कर्ज वसूली रोकने के मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक से बातचीत की गई है।
हालांकि विपक्षी दल सरकार की इन घोषणाओं को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि पांच हजार रुपये की अग्रिम सहायता से किसानों को हुए व्यापक नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती।
पार्टी ने किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग दोहराई है। इसके साथ ही लंबित फसल बीमा दावों का भुगतान और कृषि उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है।
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में कृषि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। कपास, सोयाबीन, तुअर और अन्य फसलों का उत्पादन यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में फसल खराब होने से किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। उत्पादन लागत निकालने में परेशानी होने पर किसानों को कर्ज और घरेलू खर्चों का प्रबंधन करने में भी कठिनाई होती है।
ऐसी परिस्थितियों में फसल बीमा का समय पर भुगतान और सरकारी सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
किसान संगठनों की मांग है कि फसलों के नुकसान का सही आकलन किया जाए और पात्र किसानों को बिना अनावश्यक देरी के सहायता प्रदान की जाए।
इससे पहले किसान सभा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बातचीत के बाद अपना प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया था। इसके दो दिन बाद शिवसेना (यूबीटी) ने वाशिम में समृद्धि महामार्ग पर प्रदर्शन का आह्वान किया।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि किसानों को आर्थिक सहायता देने के सवाल पर राज्य सरकार और विपक्षी दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
फिलहाल शुक्रवार को विधायक नितिन देशमुख और उनके समर्थकों को हिरासत में लिए जाने के बाद किसानों की मांगों को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार शिवसेना (यूबीटी) की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और फसल नुकसान के मुआवजे तथा बीमा भुगतान को लेकर आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं।