नई दिल्ली/उलानबटार। भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत महाराष्ट्र का एक लोकनृत्य दल मंगोलिया पहुंचा है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के सहयोग से आयोजित इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम में भारतीय कलाकार मंगोलिया के विभिन्न शहरों में अपनी पारंपरिक लोककलाओं का प्रदर्शन करेंगे। मंगोलिया की राजधानी उलानबटार स्थित भारतीय दूतावास ने कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत का सांस्कृतिक दल 29 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक मंगोलिया में विभिन्न प्रस्तुतियां देगा। इस आयोजन का उद्देश्य 'वंदे मातरम' की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करना और भारत-मंगोलिया के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाना है।भारतीय दूतावास के अनुसार, इस विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र का 'श्री बिरुदेव गजनृत्य नवयुवक मंडल' भाग ले रहा है। यह समूह भारतीय लोककला और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति देने के लिए मंगोलिया गया है। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से किया जा रहा है। इसके माध्यम से विदेशी दर्शकों को भारतीय लोकनृत्य परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया जाएगा।दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश में इस आयोजन को 'सेलिब्रेटिंग इंडिया इन मंगोलिया' नाम दिया है। इसके तहत भारतीय कलाकार मंगोलिया की राजधानी उलानबटार के अलावा नलाइख और दरखान में भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। आयोजकों ने कार्यक्रम से संबंधित एक विशेष टीजर भी साझा किया है।
29 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलेंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
भारत से पहुंचे लोकनृत्य दल का मंगोलिया दौरा 29 अक्टूबर से शुरू होकर 4 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान कलाकार विभिन्न स्थानों पर भारतीय लोकनृत्य की प्रस्तुति देंगे।दूतावास के अनुसार, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है। इस पहल से मंगोलिया के नागरिकों को भारत की पारंपरिक कला, संगीत और नृत्य के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। देश के विभिन्न राज्यों की लोककलाएं वहां के इतिहास, सामाजिक परंपराओं और स्थानीय जीवनशैली को दर्शाती हैं। महाराष्ट्र की लोकनृत्य परंपराएं भी इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
श्री बिरुदेव गजनृत्य नवयुवक मंडल देगा प्रस्तुति
मंगोलिया पहुंचे श्री बिरुदेव गजनृत्य नवयुवक मंडल को भारतीय लोकनृत्य परंपराओं के प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया गया है। महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककलाओं में सामूहिक नृत्य, लोकसंगीत, तालबद्ध गतिविधियां और सांस्कृतिक वेशभूषा का विशेष महत्व है।गजनृत्य जैसी पारंपरिक कलाएं क्षेत्रीय सामाजिक और धार्मिक विरासत से जुड़ी रही हैं। इस प्रकार की प्रस्तुतियों के माध्यम से लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखते हैं।मंगोलिया दौरे के दौरान मंडल के कलाकार अपनी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेंगे। यह आयोजन न केवल कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि भारतीय लोक परंपराओं को विदेशी दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा।
वंदे मातरम के 150 वर्षों का ऐतिहासिक महत्व
'वंदे मातरम' की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी। बाद में यह गीत उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने राष्ट्रीय चेतना और एकता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।स्वतंत्रता सेनानियों और आम नागरिकों के बीच 'वंदे मातरम' देशभक्ति की भावना का प्रमुख प्रतीक बन गया था। इस गीत ने अनेक पीढ़ियों को राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया।राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भारत सरकार ने 7 नवंबर 2025 से देशभर में विशेष कार्यक्रमों की शुरुआत की थी। वर्ष 2026 में भी इसी अभियान के तहत विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय गीत के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उसके योगदान से परिचित कराना है।
भारत-मंगोलिया के सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी मजबूती
भारत और मंगोलिया के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी। इसके बाद शिक्षा, संस्कृति, रक्षा, आध्यात्मिक विरासत और जनसंपर्क के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ता गया।मंगोलिया में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रभाव है। भारत को बौद्ध धर्म की जन्मभूमि के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संपर्क संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार रहे हैं।भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद समय-समय पर विभिन्न देशों में भारतीय कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित करती है। इन आयोजनों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य, योग और अन्य कला परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है।महाराष्ट्र के लोकनृत्य दल का यह दौरा इसी सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा है।
मंगोलिया में भारतीय नृत्य के प्रति दिखा उत्साह
महाराष्ट्र के कलाकारों के दौरे से पहले भी मंगोलिया में भारतीय नृत्य से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। भारतीय दूतावास के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को उलानबटार में 'मेलोडी ऑफ द रिवर गंगा' नामक 26वीं राष्ट्रीय भारतीय नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।इस प्रतियोगिता में मंगोलिया के विभिन्न प्रांतों से लगभग 400 बच्चों और युवाओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने भारतीय नृत्य की अलग-अलग शैलियों में प्रस्तुतियां दीं। इस आयोजन को भी 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया गया था।
महाराष्ट्र में भी हुए विशेष आयोजन
राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ पर महाराष्ट्र में भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। 3 और 4 अक्टूबर 2026 को नांदेड़ में संस्कृति मंत्रालय और सप्तरंग सेवाभावी संस्था के सहयोग से 'वंदे मातरम महोत्सव 2026' आयोजित किया गया था।इस महोत्सव में लगभग 600 विद्यार्थियों, कलाकारों और अन्य प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। समूहगान, लोकनृत्य, देशभक्ति गीत, कविता और युवा संवाद जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता तथा सांस्कृतिक विरासत का संदेश दिया गया। समूह नृत्य प्रतियोगिता में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से लगभग 40 दलों ने भाग लिया।अब मंगोलिया में महाराष्ट्र के लोकनृत्य दल की भागीदारी इस सांस्कृतिक अभियान को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा रही है।
4 नवंबर तक जारी रहेंगी प्रस्तुतियां
भारतीय दूतावास की घोषित योजना के अनुसार, श्री बिरुदेव गजनृत्य नवयुवक मंडल के कार्यक्रम 4 नवंबर तक चलेंगे। उलानबटार, नलाइख और दरखान में प्रस्तावित प्रस्तुतियों के माध्यम से मंगोलिया के दर्शक भारतीय लोककला से परिचित हो सकेंगे।यह सांस्कृतिक दौरा 'वंदे मातरम' के ऐतिहासिक महत्व को याद करने के साथ भारत और मंगोलिया के लोगों के बीच आपसी समझ तथा मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने का अवसर भी है।

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