पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में साइबर ठगी के एक बड़े मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम के एक बड़े साइबर स्कैम में शामिल था, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति से 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई थी।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान रोहन जाधव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, जब जांच के दौरान उसके बैंक अकाउंट और अन्य वित्तीय संसाधनों को फ्रीज कर दिया गया, तो उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

यह मामला इसी साल जनवरी का बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, ठगों के एक गिरोह ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग व्यक्ति से संपर्क किया था।

आरोपियों ने पीड़ित को डराते हुए कहा कि उसके खिलाफ एक गंभीर मामला दर्ज है और उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है। ठगों ने दावा किया कि अगर वह कानूनी कार्रवाई से बचना चाहता है तो उसे जांच प्रक्रिया के नाम पर पैसे जमा करने होंगे।

साइबर अपराधियों ने पीड़ित को कई तरह की धमकियां दीं और उसे मानसिक दबाव में रखा। इसके बाद उससे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 10.74 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुणे पुलिस ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने पैसों के लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की पड़ताल की। इसी आधार पर पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।

पुलिस ने बताया कि एक आरोपी को उस समय ट्रैक किया गया, जब उसने एटीएम से पैसे निकाले थे। इसके बाद जांच आगे बढ़ाई गई और मामले में कई संदिग्धों की पहचान हुई।

पुलिस ने इस मामले में हर्षद सुभाष धनतोले, समर्थ सुरेश देशमुख और अमर शिवाजी अत्तरगी नाम के तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और जांच के दौरान अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई।

इसी क्रम में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोहन जाधव का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, आरोपी की भूमिका की जांच की गई और उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।

पुलिस ने आरोपी के बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों की जांच की। कार्रवाई के बाद उसके कई बैंक अकाउंट और वित्तीय संसाधनों को फ्रीज कर दिया गया। इसके बाद रोहन जाधव ने अदालत में आत्मसमर्पण किया।

‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक नया तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे वीडियो कॉल या फोन के जरिए पीड़ितों पर दबाव बनाते हैं और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अपराधी पीड़ित को लंबे समय तक मानसिक दबाव में रखते हैं, जिससे वह बिना सोचे-समझे बड़ी रकम ट्रांसफर कर देता है।

पुणे पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर फोन करने वाले व्यक्ति से सावधान रहें। कोई भी जांच एजेंसी इस तरह से ऑनलाइन पैसे जमा करने की मांग नहीं करती।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी किस तरह से ठगी के नेटवर्क में शामिल थे और कितने लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं।

इस मामले ने एक बार फिर साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। खासकर बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाकर की जाने वाली डिजिटल ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

पुणे पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए तकनीकी निगरानी बढ़ाई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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