MUMBAI: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पायलटों के संगठन एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएलपीए इंडिया) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) से पश्चिम एशिया के लिए संचालित भारतीय एयरलाइंस की उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जब तक क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति का विस्तृत आकलन नहीं हो जाता, तब तक इन इलाकों में उड़ानों का संचालन जोखिम भरा हो सकता है।
एएलपीए इंडिया ने अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा कि पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियों और तनावपूर्ण हालात के कारण नागरिक विमानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं। संगठन ने विशेष रूप से दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख विमानन केंद्रों का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में उड़ान संचालन से पहले सुरक्षा स्थिति की पूरी समीक्षा जरूरी है।
पायलट संगठन ने बताया कि संघर्ष वाले क्षेत्रों के आसपास या उनके ऊपर से गुजरने वाली नागरिक उड़ानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें गलत पहचान के कारण सैन्य कार्रवाई का खतरा, मिसाइल हमले की आशंका, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, जीपीएस सिस्टम में बाधा और अचानक बदलते एयरस्पेस प्रतिबंध जैसी समस्याएं शामिल हैं।
एएलपीए इंडिया ने यह भी चिंता जताई कि कई बार उड़ान चालक दल को समय पर पर्याप्त खुफिया जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे आपात स्थिति में निर्णय लेना मुश्किल हो सकता है। संगठन के अनुसार, पायलटों और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि इससे पहले मार्च में भी एएलपीए इंडिया ने डीजीसीए को पत्र लिखकर पश्चिम एशिया में बदलते सैन्य हालात को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की थी। उस समय भी संगठन ने कहा था कि क्षेत्रीय तनाव का असर नागरिक विमानन पर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने से पश्चिम एशिया का माहौल संवेदनशील हो गया है। इस क्षेत्र से होकर बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें गुजरती हैं और भारत की कई एयरलाइंस भी दुबई, अबू धाबी, दोहा और अन्य खाड़ी देशों के लिए नियमित सेवाएं संचालित करती हैं।
भारतीय विमानन कंपनियां पहले भी कई बार सुरक्षा कारणों से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों के हवाई मार्ग बदलती रही हैं। एयरलाइंस आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और विमानन नियामकों के निर्देशों के आधार पर उड़ानों के संचालन का फैसला करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में वैश्विक विमानन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में उड़ानों के मार्ग बदलने, समय में बदलाव करने या कुछ सेवाओं को अस्थायी रूप से रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल एएलपीए इंडिया की मांग पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी एजेंसियों को लेना है। डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। पायलट संगठन ने साफ किया है कि उसका उद्देश्य यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही टाला जा सके।