फर्जी पहचान से शिविर में रहने का आरोप, मणिपुर में 17 लोग गिरफ्तार
मणिपुर में पंजीकृत कैडरों की पहचान में गड़बड़ी
इंफाल: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सुरक्षा बलों ने साइनाई कैंप में संयुक्त अभियान के दौरान 17 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों पर सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस यानी एसओओ व्यवस्था के तहत पंजीकृत कैडर होने का फर्जी दावा करने का आरोप है। अभियान के दौरान शिविर से हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और संचार उपकरण बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों की वास्तविक पहचान, शिविर में उनकी मौजूदगी और हथियारों से संबंधित भूमिका की जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की क्विक एक्शन टीम और कोबरा इकाई ने मिलकर की। सुरक्षा बलों ने शिविर में मौजूद लोगों का भौतिक सत्यापन किया और उनकी पहचान का मिलान पंजीकृत कैडरों के रिकॉर्ड से किया। इसी प्रक्रिया में 17 लोगों की पहचान को लेकर संदेह सामने आया। पुलिस का आरोप है कि ये लोग वास्तविक पंजीकृत सदस्यों के नाम या पहचान का इस्तेमाल कर शिविर में रह रहे थे। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में आठ पर कुकी नेशनल आर्मी और नौ पर कुकी लिबरेशन आर्मी के पंजीकृत सदस्य होने का गलत दावा करने का आरोप है। दोनों संगठनों से जुड़े रिकॉर्ड के साथ इनकी पहचान प्रमाणित नहीं हो सकी। मामला केवल शिविर में मौजूद होने तक सीमित नहीं है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित फर्जी पहचान के इस्तेमाल में शिविर संचालकों या अन्य जिम्मेदार लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
अभियान के दौरान लगभग 24 आग्नेयास्त्र, 38 मैगजीन, बड़ी मात्रा में कारतूस, विस्फोटक, वायरलेस उपकरण और अन्य सैन्य उपयोग की सामग्री जब्त की गई। हथियारों की बरामदगी के साथ उनके अधिकृत रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस अनधिकृत हथियार रखने तथा एसओओ शिविर के नियमों के संभावित उल्लंघन की भी पड़ताल कर रही है। आरोपियों को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
साइनाई कैंप कांगपोकपी जिले के साइकुल थाना क्षेत्र में साइमोल गांव में स्थित है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यहां और आसपास के क्षेत्र में कई दिनों तक निरीक्षण तथा तलाशी चली। अभियान में अलग-अलग प्रकार की स्वचालित राइफलें और अन्य हथियार मिले। सुरक्षा अधिकारियों ने कारतूसों तथा संचार साधनों की बरामदगी की भी जानकारी दी है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में कुछ वस्तुओं की गिनती में अंतर है, इसलिए विस्तृत सूची का अंतिम आधार संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड होगा।
इस कार्रवाई में शिविर के पंजीकृत सदस्यों की उपस्थिति का मामला भी सामने आया। अधिकारियों के अनुसार, कैंप में 159 पंजीकृत कैडर होने की अपेक्षा थी, जबकि सत्यापन के दौरान केवल एक पंजीकृत सदस्य मिला। बाकी सदस्यों की अनुपस्थिति के बारे में दिए गए स्पष्टीकरण की जांच की जा रही है। कुछ के घर जाने या दूसरे स्थान पर मौजूद होने की बात कही गई है। फिलहाल उनकी अनुपस्थिति का कारण और वर्तमान ठिकाना सत्यापन का विषय है।
सुरक्षा बलों ने अभियान के बाद शिविर का नियंत्रण अपने हाथ में लिया है। इसके साथ राज्य के अन्य निर्धारित एसओओ शिविरों में भी सत्यापन की योजना सामने आई है। इस प्रक्रिया में पंजीकृत कैडरों की मौजूदगी और हथियारों का मिलान किया जाएगा। साइनाई कैंप में सामने आई स्थिति ने निगरानी व्यवस्था के पालन पर सवाल खड़े किए हैं। आगे की जांच से पता चलेगा कि पहचान और उपस्थिति से जुड़ी यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई।
एसओओ व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित सशस्त्र संगठनों के साथ संघर्ष रोककर बातचीत का रास्ता बनाए रखना रहा है। इसके तहत कैडरों को निर्धारित शिविरों में रहने, हिंसा से दूर रहने और हथियारों के लिए तय सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है। अधिकारियों के अनुसार, समझौते की अवधि चार सितंबर को समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं हुआ था। हालांकि, इसे औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किए जाने के कारण कैडरों और हथियारों के शिविर में रहने की शर्त लागू बताई गई है।
यह अभियान 19 अक्टूबर को इंफाल पूर्व क्षेत्र में तीन नागरिकों की हत्या के बाद तेज हुई सुरक्षा गतिविधियों की पृष्ठभूमि में हुआ है। उस हमले में अन्य लोग घायल भी हुए थे। घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ा और सुरक्षा बलों ने तलाशी तथा सत्यापन की कार्रवाई की। हालांकि, साइनाई कैंप से गिरफ्तार सभी 17 लोगों को उस हमले में शामिल बताने का आधार फिलहाल सार्वजनिक जानकारी में सामने नहीं आया है। उनकी भूमिका पर जांच का निष्कर्ष आना बाकी है। फिलहाल जांच का केंद्र आरोपियों की पहचान, शिविर में प्रवेश, हथियारों का अनधिकृत कब्जा और नियमों के उल्लंघन में संभावित जिम्मेदारी है। पुलिस हिरासत के दौरान इन बिंदुओं पर पूछताछ की जाएगी। गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद अब दस्तावेजों तथा शिविर के रिकॉर्ड का मिलान मामले की आगे की दिशा तय करेगा।