इंफाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और हालिया हत्याओं के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। राज्य में शांति बहाल करने, हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर विशाल महारैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। रैली में शामिल लोगों का कहना था कि मणिपुर की जनता अब हिंसा और असुरक्षा के माहौल से परेशान हो चुकी है और सामान्य जीवन में लौटना चाहती है।
मणिपुर की राजधानी इंफाल में 31 अक्टूबर को आयोजित महारैली में विभिन्न समुदायों के हजारों लोगों ने भाग लिया। इस प्रदर्शन का आयोजन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) और कई सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से किया था। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर हिंसा समाप्त करने, प्रभावित लोगों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने और राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने की मांग उठाई। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'मणिपुर बचाओ', 'हमें शांति और न्याय चाहिए' तथा 'प्रॉक्सी वॉर बंद करो' जैसे नारे लगाए। लोगों ने कहा कि लगातार हो रही हिंसक घटनाओं से आम नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है। बच्चों की शिक्षा, व्यापारिक गतिविधियां और सामान्य जनजीवन पर इसका गंभीर असर पड़ा है। लंबे समय से राहत शिविरों में रह रहे परिवार भी अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि हिंसा रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। रैली के दौरान कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था के बावजूद राज्य में हिंसा और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। SoO समझौता केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कुकी-जोमी समुदाय के कुछ सशस्त्र संगठनों के बीच किया गया त्रिपक्षीय समझौता है। इसका उद्देश्य संबंधित संगठनों और सुरक्षा बलों के बीच सशस्त्र संघर्ष को रोकना तथा राजनीतिक समाधान के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना था। हालांकि, इस समझौते को लेकर विभिन्न समुदायों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
महारैली के दौरान मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारी संगठनों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हिंसक घटनाओं को रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई है। हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारी संगठनों के हैं और इन्हें सरकार के खिलाफ सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसी बीच 5 नवंबर को उखरुल और कामजोंग जिलों में भी नगा संगठनों की ओर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने लगातार हो रही हिंसा, हालिया गोलीबारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उखरुल में प्रदर्शन के दौरान कई दुकानें, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। यातायात सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
इन प्रदर्शनों से पहले इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर यात्री वाहनों की ओर संदिग्ध हथियारबंद लोगों द्वारा गोलीबारी की घटना सामने आई थी। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था। मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुए जातीय संघर्ष ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं से शांति बहाली की कोशिशों को भी झटका लग रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मणिपुर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए केवल सुरक्षा बलों की तैनाती पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा बहाल करना, राजनीतिक संवाद को मजबूत बनाना और विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। फिलहाल मणिपुर में निकाली गई इन विशाल रैलियों ने एक बार फिर राज्य की कानून व्यवस्था और शांति बहाली के प्रयासों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट संदेश है कि वे हिंसा और भय के बजाय सुरक्षित तथा शांतिपूर्ण भविष्य चाहते हैं। अब देखना होगा कि केंद्र और राज्य सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती हैं।
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