मेघालय में भाजपा की ताकत बढ़ी, आठ यूडीपी विधायकों के विलय को मान्यता
भाजपा के विधायक दो से बढ़कर 10
शिलांग: मेघालय की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. संगमा ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी यानी यूडीपी के आठ विधायकों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को आधिकारिक मान्यता दे दी है। इसके साथ ही 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है। वहीं, यूडीपी की संख्या 12 से घटकर चार रह गई है। विधानसभा सचिवालय की ओर से 16 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी गई।
स्पीकर ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा चार के तहत आठ विधायकों के विलय को मान्यता दी है। विधानसभा सचिवालय के बुलेटिन में संबंधित विधायकों के नाम दर्ज करते हुए दोनों दलों की नई सदस्य संख्या स्पष्ट की गई है। इस फैसले के बाद विधानसभा के रिकॉर्ड में ये आठ सदस्य भाजपा विधायक दल का हिस्सा हो गए हैं। भाजपा में शामिल होने की राजनीतिक घोषणा के बाद अब सदन के भीतर उनकी स्थिति को भी औपचारिक मान्यता मिल गई है।
विलय को मान्यता पाने वाले विधायकों में लाहकमेन रिम्बुई, पायस मारवेन, कायरमेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू बियॉन्डस्टार कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीद कुपर सिनरेम और सिनशर कुपर रॉय लिंगदोह थाबाह शामिल हैं। इन आठ सदस्यों के एक साथ जाने से यूडीपी विधायक दल का आकार काफी छोटा हो गया है। दूसरी ओर भाजपा को विधानसभा में पहले की तुलना में कहीं अधिक संख्यात्मक मौजूदगी मिली है। अधिसूचना में भाजपा के 10 और यूडीपी के चार विधायक होने की पुष्टि की गई है।
यह घटनाक्रम अचानक हुई घोषणा तक सीमित नहीं है। आठों विधायक 23 सितंबर को नई दिल्ली में भाजपा में शामिल हुए थे। इसके दो दिन बाद, 25 सितंबर को उन्होंने मेघालय विधानसभा को अपने विलय की जानकारी देते हुए पत्र सौंपा था। इसके बाद मामला विधानसभा अध्यक्ष के विचाराधीन रहा। राजनीतिक दल में शामिल होने के बाद सदन में विलय की मान्यता का प्रश्न बाकी था, जिस पर अब फैसला सामने आया है।
इससे पहले 13 अक्टूबर को विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया था कि प्रस्तावित विलय की जांच जारी है। उन्होंने कहा था कि विभिन्न स्रोतों से कानूनी राय प्राप्त करने और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्णय लिया जाएगा। उस समय उन्होंने आठों सदस्यों को औपचारिक रूप से भाजपा विधायक मानने से इनकार किया था, क्योंकि मामला परीक्षण के स्तर पर था। विधायकों से मुलाकात के बाद भी स्पीकर ने अपनी यही स्थिति बताई थी। अब नई अधिसूचना के साथ उस प्रक्रिया का परिणाम सामने आया है।
यूडीपी ने संबंधित विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका भी दाखिल की थी। पहले सामने आई जानकारी के अनुसार, स्पीकर कार्यालय ने याचिका में कुछ कमियां पाए जाने पर उन्हें दूर करके दोबारा प्रस्तुत करने के लिए समय दिया था। ताजा स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा अध्यक्ष ने एक अलग आदेश में अयोग्यता संबंधी याचिका खारिज कर दी है। इस तरह विलय को मान्यता देने के साथ विधायकों की सदस्यता से जुड़े विवाद पर भी स्पीकर के स्तर पर निर्णय सामने आया है।
राजनीतिक दृष्टि से इस बदलाव का तत्काल प्रभाव सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर दोनों दलों की संख्या पर पड़ा है। भाजपा और यूडीपी, दोनों नेशनल पीपुल्स पार्टी यानी एनपीपी के नेतृत्व वाले मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस के घटक हैं। इसलिए घटनाक्रम का प्रमुख परिणाम गठबंधन के भीतर भाजपा की बढ़ी हुई और यूडीपी की घटी हुई विधायी ताकत के रूप में सामने आया है। आठ सदस्यों के जुड़ने से भाजपा की सदन में मौजूदगी पांच गुना हो गई है।
यूडीपी के सामने अब चार विधायकों के साथ अपनी विधायी भूमिका आगे बढ़ाने की स्थिति है। वहीं, भाजपा विधानसभा में 10 सदस्यों के साथ काम करेगी। संख्यात्मक बदलाव स्पष्ट है, लेकिन भविष्य में गठबंधन की भूमिका और राजनीतिक निर्णयों पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह आगे के घटनाक्रम से तय होगा। फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष की मान्यता ने सितंबर से लंबित औपचारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है और मेघालय विधानसभा में दोनों दलों का नया समीकरण दर्ज हो गया है