शिलांग। मेघालय की राजनीति में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. संगमा ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के तीन विधायकों के सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) में विलय को औपचारिक मान्यता दे दी है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, विधानसभा सचिवालय ने भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत यह आदेश जारी किया है। इस घटनाक्रम से राज्य विधानसभा में राजनीतिक दलों के संख्या बल में बदलाव हुआ है।इससे पहले 16 अक्टूबर को विधानसभा अध्यक्ष ने UDP के आठ विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को मान्यता दी थी। लगातार हुए इन घटनाक्रमों के बाद क्षेत्रीय दल UDP की विधानसभा में स्थिति काफी कमजोर हो गई है।
इन तीन विधायकों के NPP में विलय को मान्यता
विधानसभा सचिवालय के 23 अक्टूबर के बताए गए आदेश के अनुसार, जिन तीन विधायकों के NPP में विलय को मान्यता दी गई है, उनमें वेस्ट शिलांग विधानसभा क्षेत्र से पॉल लिंगदोह, मावकिरवाट से रेनिक्टन लिंगदोह टोंगखार और मोकाइयाव से नुजोर्की सुंगोह शामिल हैं।तीनों विधायक इससे पहले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हुए थे। उन्होंने NPP में शामिल होने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था।19 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, तीनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात करके विलय का अनुरोध किया था। उस समय अध्यक्ष ने कहा था कि कानूनी राय और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने संवैधानिक प्रावधान का किया इस्तेमाल
विधायकों के विलय से जुड़े मामलों में संविधान की दसवीं अनुसूची महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।दसवीं अनुसूची का पैरा 4 निर्धारित शर्तों के तहत राजनीतिक दलों के विलय की स्थिति में विधायकों को दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से संरक्षण प्रदान करता है।इसके लिए संबंधित विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है।इस मामले में UDP के शेष चार विधायकों में से तीन ने NPP में शामिल होने का निर्णय लिया था।विधानसभा अध्यक्ष को इस प्रकार के मामलों में संबंधित दस्तावेजों, विधायकों की सहमति और संवैधानिक प्रावधानों का परीक्षण करना होता है।
पहले आठ विधायकों ने थामा था भाजपा का दामन
इससे पहले 16 अक्टूबर 2026 को मेघालय विधानसभा अध्यक्ष ने UDP के आठ विधायकों के भाजपा में विलय को मंजूरी दी थी।उस समय UDP के विधानसभा में कुल 12 सदस्य थे, जिनमें से आठ भाजपा में शामिल हो गए।इन आठ विधायकों में लाहकमेन रिम्बुई, पायस मारवेन, कायरमेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू बियॉन्डस्टार कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजिद कुपर सिनरेम और सिनशर कुपर रॉय लिंगदोह थाबाह शामिल थे।इस विलय के बाद भाजपा के विधायकों की संख्या दो से बढ़कर दस हो गई थी, जबकि UDP के पास चार विधायक रह गए थे।
अब UDP के पास केवल एक विधायक
तीन और विधायकों के NPP में जाने के बाद UDP के पास विधानसभा में केवल एक विधायक बचने की स्थिति बन गई है।वह विधायक पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह हैं। लगातार 11 विधायकों के अलग होने से पार्टी के विधानसभा प्रतिनिधित्व में भारी कमी आई है।दूसरी ओर, NPP के विधायकों की संख्या 33 से बढ़कर 36 होने की स्थिति बनी है।मेघालय विधानसभा में कुल 60 सदस्य हैं। ऐसे में विधायकों के इस बदलाव का असर सदन के भीतर राजनीतिक दलों के संख्या बल पर दिखाई देगा।
 तीन विधायकों को UDP ने किया था निष्कासित
राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान UDP नेतृत्व ने NPP में जाने का निर्णय लेने वाले तीन विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की थी।पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने पॉल लिंगदोह, रेनिक्टन लिंगदोह टोंगखार और नुजोर्की सुंगोह को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने की घोषणा की थी।इस फैसले के बाद विधायकों के विलय और उनकी विधानसभा सदस्यता की स्थिति को लेकर संवैधानिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई थी।विधानसभा अध्यक्ष ने पहले ही स्पष्ट किया था कि केवल आवेदन मिलने से विलय स्वतः मान्य नहीं हो जाता। इसके लिए आवश्यक कानूनी जांच जरूरी है।
 सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बदले राजनीतिक समीकरण
मेघालय में मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व में नेशनल पीपुल्स पार्टी की अगुवाई वाला मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस सत्ता में है।भाजपा और UDP भी इस गठबंधन का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में हालिया घटनाक्रम मुख्य रूप से सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर विभिन्न दलों के प्रतिनिधित्व में बदलाव से जुड़ा है।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले भाजपा और इसके बाद NPP के विधानसभा सदस्यों की संख्या बढ़ी है।
अगले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी हलचल
मेघालय में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में प्रस्तावित है। ऐसे समय में विधायकों के लगातार दल बदलने से क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि UDP अपने संगठन और जनाधार को किस तरह मजबूत करती है तथा NPP और भाजपा के बढ़े हुए संख्या बल का राज्य की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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