सुंदरगढ़। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान का मामला सामने आया है। शनिवार को सुबडेगा ब्लॉक प्रशासन की ओर से न्यू ओडिशा हाई स्कूल मैदान में आयोजित ब्लॉक स्तरीय समारोह के दौरान तिरंगा कथित रूप से उल्टा फहराए जाने की बात सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक, समारोह में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान ध्वजारोहण कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्रीय ध्वज गलत दिशा में फहराया गया। बताया जा रहा है कि तिरंगे की हरी पट्टी ऊपर की ओर दिखाई दे रही थी, जबकि केसरिया पट्टी नीचे की तरफ थी। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के आधिकारिक कार्यक्रम में हुई इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज देश की आन, बान और शान का प्रतीक है और इसे फहराते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

यह कार्यक्रम सुबडेगा ब्लॉक प्रशासन की ओर से आयोजित किया गया था। समारोह में कई गणमान्य व्यक्ति, अधिकारी और स्थानीय निवासी शामिल हुए थे। कार्यक्रम में सुबडेगा पंचायत समिति की अध्यक्ष कुंती प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं।

इसके अलावा कार्यक्रम में ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) विश्वनाथ साहू, पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सुशांत बेहरा और न्यू ओडिशा हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका सबिता पटनायक समेत कई अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ध्वजारोहण के समय बड़ी संख्या में लोग मैदान में मौजूद थे। हालांकि, तिरंगा उल्टा फहराए जाने की बात सामने आने के बाद लोगों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर देश में विशेष नियम निर्धारित हैं। भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, तिरंगे को सम्मानपूर्वक और सही तरीके से फहराना अनिवार्य है। ध्वज के रंगों और दिशा में किसी भी तरह की गलती को गंभीरता से लिया जाता है।

इस मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से घटना की जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ध्वजारोहण के दौरान गलती किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में अधिकारियों और आयोजकों को पहले से सभी व्यवस्थाओं की जांच कर लेनी चाहिए थी। उनका कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

वहीं, कुछ लोगों ने इसे मानवीय भूल बताते हुए मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जानबूझकर या अनजाने में हुई ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए।

स्वतंत्रता दिवस समारोह पूरे देश में देशभक्ति और गौरव के साथ मनाया जाता है। ऐसे आयोजनों में राष्ट्रीय ध्वज फहराना सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होता है। इसलिए ध्वजारोहण से पहले झंडे की स्थिति और दिशा की जांच करना जरूरी माना जाता है।

सुंदरगढ़ की इस घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत पर भी चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में आधिकारिक जांच और प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी कि यह गलती कैसे हुई और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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