ओडिशा में भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा, 41 कर्मचारी बर्खास्त, 91 पूर्व कर्मचारियों की पेंशन बंद
भुवनेश्वर। ओडिशा की मोहन चरण माझी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को बताया कि जून 2024 में उनकी सरकार के गठन के बाद से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए 41 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किया गया है। इसके अलावा 91 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन भी रोक दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करना और आम जनता तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री माझी की सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राज्यस्तरीय सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का ब्योरा दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को भ्रष्टाचार में शामिल पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसी प्रणाली विकसित करना भी है, जिससे अनियमितताओं को रोका जा सके।
41 कर्मचारियों की नौकरी गई, 91 की पेंशन रोकी
मुख्यमंत्री ने बताया कि जून 2024 से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि के बाद 41 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। इसी अवधि में भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए 91 सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों की पेंशन रोक दी गई है।
माझी ने कहा कि भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को यह समझना होगा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को प्रभावी बनाने और दोषियों को सजा दिलाने पर विशेष ध्यान दे रही है।मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य सतर्कता विभाग भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
आईएएस अधिकारी समेत कई वरिष्ठ अफसरों पर कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में ओडिशा सतर्कता विभाग ने विभिन्न स्तरों के सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।इनमें एक आईएएस अधिकारी, मुख्य अभियंता स्तर के आठ अधिकारी, दो प्रभागीय वन अधिकारी, आबकारी विभाग और राज्य परिवहन प्राधिकरण के संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं।इसके अलावा खनन विभाग के तीन उपनिदेशक, पांच तहसीलदार और चार प्रखंड विकास अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्रवाई करते समय अधिकारियों के पद और वरिष्ठता को आधार बनाकर कोई छूट नहीं दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।
भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि दर बढ़कर 65 प्रतिशत
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सतर्कता विभाग के कामकाज का विवरण देते हुए बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।उनके अनुसार, वर्ष 2025 में ओडिशा सतर्कता विभाग की दोषसिद्धि दर 50 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 65 प्रतिशत पहुंच गई।उन्होंने कहा कि विभाग जांच की गुणवत्ता में सुधार और अदालतों में मजबूत तरीके से मामलों की पैरवी करने पर ध्यान दे रहा है।सरकार का मानना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में समय पर जांच और प्रभावी कानूनी कार्रवाई से प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत किया जा सकता है।
516 आपराधिक मामले दर्ज, 537 लोगों की गिरफ्तारी
कार्यक्रम में ओडिशा सतर्कता विभाग के निदेशक यशवंत कुमार जेठवा ने भी विभाग की कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया।उन्होंने बताया कि 12 जून 2024 से 26 अक्टूबर 2026 के बीच भ्रष्टाचार से जुड़े 516 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 890 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें 134 प्रथम श्रेणी के अधिकारी भी शामिल हैं।इस अवधि में सतर्कता विभाग ने 537 आरोपियों को गिरफ्तार किया। विभाग ने आय से अधिक संपत्ति से संबंधित जांच में लगभग 332 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता लगाने की जानकारी भी दी।ये आंकड़े विभाग की जांच और कार्रवाई से संबंधित हैं। गिरफ्तार होना या किसी मामले में आरोपी बनाया जाना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं माना जाता।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए नई रिसर्च विंग बनेगी
मुख्यमंत्री ने बताया कि ओडिशा सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।इसके तहत राज्य सरकार ने ओडिशा आईटी नीति को मंजूरी दी है। साथ ही सतर्कता विभाग में 'प्रिवेंटिव विजिलेंस रिसर्च विंग' विकसित करने की पहल की गई है।यह विशेष इकाई विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान करने और प्रशासनिक खामियों का अध्ययन करने का काम करेगी।इसके आधार पर संबंधित विभागों को भ्रष्टाचार रोकने के उपाय सुझाए जा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य जांच के साथ-साथ भ्रष्टाचार की संभावनाओं को पहले ही कम करना है।
जनसुनवाई से लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए जनसुनवाई कार्यक्रम चला रही है।उनके अनुसार, इस व्यवस्था के माध्यम से आम नागरिक मुख्यमंत्री और मंत्रियों के सामने अपनी समस्याएं तथा भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें रख सकते हैं।उन्होंने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल नई योजनाएं और नीतियां बनाना नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सरकारी धन सही उद्देश्य पर खर्च हो और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।मुख्यमंत्री ने जनधन, आधार और मोबाइल आधारित व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी सहायता वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने और धन के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिली है।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले सतर्कता अधिकारियों का सम्मान
राज्यस्तरीय सतर्कता जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और इकाइयों को सम्मानित भी किया गया।वर्ष 2025 के प्रदर्शन के आधार पर कोरापुट सतर्कता डिवीजन को सर्वश्रेष्ठ डिवीजन और अंगुल इकाई को सर्वश्रेष्ठ यूनिट का पुरस्कार दिया गया।इसके अलावा उत्कृष्ट जांच कार्य करने वाले अधिकारियों और कानूनी प्रक्रिया में योगदान देने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को ईमानदारी तथा सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों से सार्वजनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करने की अपील की।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान जारी रखने का ऐलान
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी। सतर्कता विभाग को जांच के लिए आवश्यक संसाधन और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिसमें जनता को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
ओडिशा सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ नौकरी से बर्खास्तगी और पेंशन रोकने जैसी कार्रवाई की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और पद का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।