सुंदरगढ़ के आदिवासी इलाके में बदहाल स्कूल, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर 40 से अधिक छात्र

Update: 2026-07-24 07:27 GMT

सुंदरगढ : ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के बोनाईगढ़ इलाके के एक दूर-दराज आदिवासी क्षेत्र से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सिंदूरकला प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले 40 से अधिक छात्र बुनियादी सुविधाओं की कमी और जर्जर भवन के बीच अपनी पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन की खराब हालत के कारण बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सिंदूरकला प्राइमरी स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 40 से अधिक है, लेकिन इन बच्चों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित कक्षों की व्यवस्था नहीं है। स्कूल का संचालन केवल दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

स्कूल में सिर्फ दो क्लासरूम उपलब्ध हैं। जगह की कमी के कारण एक पुरानी और जर्जर इमारत का इस्तेमाल कक्षा और स्कूल कार्यालय दोनों के रूप में किया जा रहा है। इस भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कभी भी कोई अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के मौसम में स्कूल की समस्या और बढ़ जाती है। भवन की छत से पानी टपकने के कारण शिक्षकों को मजबूरी में छत को प्लास्टिक शीट से ढकना पड़ा है। बारिश का पानी सीधे कक्षा में न गिरे, इसके लिए कमरे के अंदर भी प्लास्टिक के तिरपाल लगाए गए हैं।

ऐसे हालात में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षक भी कठिन परिस्थितियों में कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। बारिश के दौरान कई बार पढ़ाई रोकनी पड़ती है, क्योंकि कमरे में पानी भरने और छत से पानी गिरने की समस्या सामने आती है।

अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना चाहते हैं, लेकिन स्कूल की मौजूदा स्थिति चिंता का विषय है। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, लेकिन जर्जर भवन के कारण हर समय खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल भवन की मरम्मत कराई जाए या नए भवन का निर्माण किया जाए। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

शिक्षकों के अनुसार, वे उपलब्ध संसाधनों के साथ बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, भवन की खराब स्थिति और सीमित सुविधाओं के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि बारिश के समय सबसे अधिक परेशानी होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक शिक्षा के लिए सुरक्षित और बेहतर बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी है। खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल भवन, पर्याप्त कक्षाएं और शिक्षकों की उपलब्धता बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती है।

सिंदूरकला प्राइमरी स्कूल की स्थिति यह दिखाती है कि कई दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी स्कूल अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जहां एक ओर सरकार शिक्षा के विस्तार और डिजिटल सुविधाओं पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्कूलों में भवन और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पाई हैं।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द कदम उठाएगा। स्कूल भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण से बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई भी बेहतर तरीके से जारी रह सकेगी।

फिलहाल सिंदूरकला प्राइमरी स्कूल में बच्चे और शिक्षक इसी जर्जर भवन में पढ़ाई जारी रखने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।

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