भुवनेश्वर। दिवाली और अन्य त्योहारों से पहले ओडिशा सरकार ने सरकारी खर्च को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अपनी 'नो गिफ्ट पॉलिसी' को एक बार फिर लागू रखने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कार्यालय, विभाग या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) द्वारा त्योहारों के अवसर पर उपहार और संबंधित वस्तुओं की खरीद के लिए सरकारी धन खर्च नहीं किया जाएगा। वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक धन के अनावश्यक इस्तेमाल पर रोक लगाना और सरकारी संस्थानों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना है।

राज्य के वित्त विभाग के प्रधान सचिव संजीब कुमार मिश्रा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि ओडिशा सरकार ने चालू वर्ष में भी केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा निर्धारित 'नो गिफ्ट पॉलिसी' को अपनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत दिवाली सहित विभिन्न त्योहारी अवसरों पर सरकारी धन से उपहार खरीदने या वितरित करने की अनुमति नहीं होगी।

वित्त विभाग ने यह पत्र सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, आयुक्त-सह-सचिवों और सचिवों को भेजा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीन आने वाले विभागों और कार्यालयों में नीति का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि त्योहारी अवसरों के नाम पर सरकारी बजट से अनावश्यक खर्च स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकारी कार्यालयों में उपहार, गिफ्ट पैक और इसी प्रकार की वस्तुओं की खरीद पर सार्वजनिक धन खर्च करने से बचना होगा।

इस आदेश का दायरा केवल राज्य सरकार के विभागों तक सीमित नहीं है। राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भी निर्देशों का पालन करना होगा। इससे विभिन्न सरकारी संस्थानों में उपहारों पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है।

दरअसल, दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के अवसर पर कई संस्थानों में कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को मिठाइयां, उपहार तथा स्मृति-चिह्न देने की परंपरा रही है। हालांकि, जब ऐसी वस्तुओं की खरीद सरकारी धन से की जाती है, तो सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सरकारी संस्थानों में उपहारों से जुड़े खर्च पर रोक लगाने की नीति निर्धारित की थी। ओडिशा सरकार ने भी इसी व्यवस्था को अपनाते हुए राज्य के सभी संबंधित कार्यालयों के लिए निर्देश जारी किए हैं।

उल्लेखनीय है कि यह नीति ओडिशा में पहली बार लागू नहीं की जा रही है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में भी केंद्र सरकार की 'नो गिफ्ट पॉलिसी' को अपनाया था। वित्त विभाग ने 17 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी किए थे। उस आदेश का विवरण ओडिशा सरकार के वित्त विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

पिछले वर्ष केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने सितंबर में एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें सरकारी मंत्रालयों, विभागों और अन्य सरकारी संस्थाओं को दिवाली तथा अन्य त्योहारों पर उपहार और संबंधित वस्तुओं के लिए सरकारी धन खर्च नहीं करने के निर्देश दिए गए थे।

उस समय जारी निर्देशों में उपहार, स्मृति-चिह्न, मिठाइयों और इसी तरह की वस्तुओं पर सरकारी खर्च रोकने की बात कही गई थी। इसके पीछे वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी खर्चों में कमी लाने का उद्देश्य बताया गया था।

अब ओडिशा सरकार ने वर्ष 2026 के त्योहारी मौसम में भी इसी नीति को जारी रखने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने साफ किया है कि सभी विभागों को केंद्र सरकार के संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

सरकारी खजाने से होने वाला प्रत्येक खर्च निर्धारित नियमों और सार्वजनिक हित के अनुरूप होना चाहिए। वित्तीय अनुशासन की इसी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारें समय-समय पर गैर-जरूरी खर्चों को नियंत्रित करने के निर्देश जारी करती हैं।

ओडिशा सरकार की यह पहल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे विभागों में त्योहारों के नाम पर उपहार खरीदने और वितरित करने के लिए सरकारी धन इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है।

हालांकि, यह समझना आवश्यक है कि यह निर्देश सरकारी धन से उपहारों पर खर्च करने से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आम नागरिकों के बीच निजी खर्च से उपहारों के आदान-प्रदान पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है।

आदेश के अनुसार, प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सार्वजनिक धन के उपयोग को नियंत्रित करना है। निजी व्यक्तियों के बीच त्योहारों पर उपहार देने की सामान्य परंपरा इस आदेश का विषय नहीं है।

सरकार ने विभागीय प्रमुखों को निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है। इससे प्रत्येक विभाग में वित्तीय नियमों के पालन और खर्च की निगरानी का महत्व बढ़ गया है।

सरकारी संस्थानों में खर्च की जवाबदेही बनाए रखना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब विभिन्न विभागों में सार्वजनिक धन के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश लागू होते हैं, तो खर्चों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकती है।

इस नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सभी विभागों के लिए समान निर्देश लागू किए गए हैं। इससे सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में त्योहारों से जुड़े खर्च को लेकर एकरूपता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

वर्ष 2025 में भी ओडिशा सरकार के इस फैसले की चर्चा हुई थी। उस समय उपमुख्यमंत्री प्रवती परिडा ने लोगों से अपने कार्यालय में उपहार नहीं लाने का अनुरोध किया था। उन्होंने सरकारी संस्थानों में उपहारों पर खर्च रोकने की नीति का समर्थन किया था।

वर्तमान आदेश के जरिए राज्य सरकार ने फिर संकेत दिया है कि त्योहारों के दौरान सरकारी खर्च में भी वित्तीय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

वित्त विभाग की ओर से सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश भेजे जाने के बाद अब संबंधित विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों की जिम्मेदारी होगी कि वे इनका पालन सुनिश्चित करें।

फिलहाल सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों और पीएसयू को स्पष्ट निर्देश दिया है कि दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान उपहार तथा संबंधित वस्तुओं पर सार्वजनिक धन खर्च नहीं किया जाए।

सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक जवाबदेही, वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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