मध्य पूर्व में युद्ध का ओडिशा के सीफूड कारोबार पर असर, निर्यातकों को 23.40 करोड़ का नुकसान
भुवनेश्वर। मध्य पूर्व में जारी युद्ध और अशांति का असर ओडिशा के समुद्री भोजन यानी सीफूड निर्यात पर पड़ा है। मध्य पूर्वी देशों में ओडिशा से भेजे जाने वाले सीफूड के निर्यात में गिरावट के कारण राज्य के निर्यातकों को करीब 23.40 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुल नंदा मल्लिक ने बुधवार को ओडिशा विधानसभा में यह जानकारी दी।
विधायक प्रताप केशरी देब के एक सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से अगस्त के बीच मध्य पूर्वी देशों को ओडिशा से होने वाले सीफूड निर्यात में पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में कमी दर्ज की गई। इस दौरान निर्यात मूल्य में 14.57 प्रतिशत की गिरावट आई।
विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में ओडिशा ने मध्य पूर्वी देशों को 160.57 करोड़ रुपये का सीफूड निर्यात किया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह घटकर 137.17 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह निर्यात मूल्य में करीब 23.40 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
मंत्री ने इस गिरावट के पीछे मध्य पूर्व में जारी युद्ध और अशांति को एक प्रमुख कारण बताया। क्षेत्र में तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, माल ढुलाई और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने से सीफूड निर्यात पर असर पड़ा।
समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात में समय और परिवहन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। उत्पादों को तय तापमान पर रखने के लिए मजबूत कोल्ड चेन की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय मार्गों में व्यवधान या माल पहुंचने में देरी होने से निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है और ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं।
मध्य पूर्व में निर्यात 14.57 प्रतिशत घटा
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार अप्रैल-अगस्त अवधि के दौरान मध्य पूर्व के बाजार में ओडिशा के सीफूड निर्यात का मूल्य 14.57 प्रतिशत कम हुआ। आंकड़ों के लिहाज से पिछले वर्ष के 160.57 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार केवल 137.17 करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया गया।
इस तरह दोनों अवधियों के बीच अंतर 23.40 करोड़ रुपये रहा। सरकार ने इसे मध्य पूर्व की परिस्थितियों से प्रभावित निर्यात के रूप में विधानसभा के सामने रखा है।
मध्य पूर्व भारतीय समुद्री उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल है। ऐसे में क्षेत्र में संघर्ष की स्थिति लंबे समय तक बने रहने पर परिवहन लागत, बीमा और आपूर्ति व्यवस्था जैसी चुनौतियां निर्यातकों के लिए चिंता बढ़ा सकती हैं।
वैश्विक बाजार में ओडिशा का प्रदर्शन बेहतर
मध्य पूर्व में निर्यात घटने के बावजूद ओडिशा के लिए राहत की बात यह रही कि वैश्विक स्तर पर राज्य के कुल सीफूड निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई। विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक राज्य का कुल समुद्री खाद्य निर्यात 16.36 प्रतिशत बढ़ा है।
निर्यात मूल्य के हिसाब से पिछले वर्ष की तुलना में 763.94 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि मध्य पूर्वी बाजार में आई गिरावट की भरपाई दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी मांग और निर्यात से हुई।
यानी एक तरफ मध्य पूर्व में युद्ध और अस्थिरता ने ओडिशा के सीफूड कारोबार को प्रभावित किया, वहीं दूसरी तरफ दूसरे देशों में राज्य के समुद्री उत्पादों की मांग बढ़ने से कुल निर्यात का प्रदर्शन सकारात्मक रहा।
ओडिशा के लिए अहम है सीफूड सेक्टर
लंबी समुद्री तटरेखा वाले ओडिशा में मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य उत्पादन आजीविका तथा निर्यात दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। राज्य से झींगा और विभिन्न प्रकार की मछलियों समेत कई समुद्री उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजे जाते हैं।
सीफूड उद्योग से केवल बड़े निर्यातक ही नहीं बल्कि मछुआरे, मत्स्य उत्पादक, प्रसंस्करण इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग भी जुड़े हुए हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला बदलाव पूरी आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
सीफूड कारोबार में अंतरराष्ट्रीय मांग और कीमतों के साथ परिवहन लागत की भी बड़ी भूमिका होती है। खासकर युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के दौरान समुद्री मार्ग प्रभावित होने पर माल ढुलाई महंगी हो सकती है।
दूसरे बाजारों में बढ़ी मांग से मिली राहत
मध्य पूर्व को होने वाले निर्यात में कमी के बावजूद ओडिशा के कुल सीफूड निर्यात में 16.36 प्रतिशत की बढ़ोतरी से पता चलता है कि राज्य के उत्पादों ने अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।
कुल निर्यात मूल्य में 763.94 करोड़ रुपये की वृद्धि इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि मध्य पूर्व में हुए नुकसान के बावजूद ओडिशा का सीफूड निर्यात पूरी तरह दबाव में नहीं आया।
निर्यात बाजारों में विविधता होने का फायदा ऐसे समय में मिलता है, जब किसी एक क्षेत्र में राजनीतिक संकट, युद्ध या आर्थिक समस्या के कारण मांग और आपूर्ति प्रभावित होती है।
युद्ध से बढ़ी कारोबार की अनिश्चितता
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का प्रभाव वैश्विक व्यापार के कई क्षेत्रों पर देखने को मिला है। समुद्री खाद्य कारोबार भी इससे अछूता नहीं है। सीफूड जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए समय पर डिलीवरी जरूरी होती है। इसलिए मार्ग में देरी या लॉजिस्टिक व्यवस्था में बाधा निर्यातकों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा करती है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव के दौरान जहाजों के मार्ग में बदलाव, बीमा लागत में बढ़ोतरी और परिवहन में देरी जैसी स्थितियां निर्यात कारोबार की लागत बढ़ा सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों पर अधिक दबाव पड़ सकता है।
यूपी भाजपा में चार नेताओं को बड़ी जिम्मेदारीविधानसभा में इस मुद्दे के सामने आने के बाद राज्य के सीफूड निर्यात पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के प्रभाव की तस्वीर भी स्पष्ट हुई है। आंकड़े बताते हैं कि मध्य पूर्व में ओडिशा का कारोबार प्रभावित हुआ है, लेकिन वैश्विक स्तर पर निर्यात बढ़ा है।
अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच मध्य पूर्वी देशों को निर्यात में 23.40 करोड़ रुपये की कमी के बावजूद दूसरे वैश्विक बाजारों में बेहतर कारोबार ने राज्य के कुल निर्यात को मजबूती दी।
मध्य पूर्व की परिस्थितियां आगे कैसी रहती हैं, इसका असर आने वाले महीनों में सीफूड निर्यात पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक ओडिशा का सीफूड उद्योग मध्य पूर्व में गिरावट के बावजूद वैश्विक स्तर पर बढ़त दर्ज करने में सफल रहा है।