Bhubaneswar भुवनेश्वर: ओडिशा का जल संसाधन विभाग सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करेगा, ताकि उनके लागू होने में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके और निर्माण की प्रगति व गुणवत्ता पर कड़ी नज़र रखी जा सके।
विभाग ने अधिकारियों को 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के तहत आने वाले 'त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम' (AIBP) की परियोजनाओं का नियमित ड्रोन सर्वे करने का निर्देश दिया है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ को लिखे एक पत्र में, अंडर सेक्रेटरी आरती मल्लिक ने कहा कि सर्वे से साइट की असल स्थिति का पता लगाने, निर्माण की प्रगति की निगरानी करने और काम की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी। राज्य ने केंद्रीय जल आयोग (CWC) की सिफारिशों के बाद इस सिस्टम को शुरू करने का फैसला किया है। विभाग के तहत AIBP परियोजनाओं के मुख्य हिस्सों को ड्रोन सर्वे में शामिल किया जाएगा। केंद्र ने भौगोलिक कोऑर्डिनेट्स (geographical coordinates) के साथ टैग की गई तस्वीरों और वीडियो फुटेज के ज़रिए परियोजनाओं का रिकॉर्ड रखने के लिए नियमित ड्रोन-आधारित निगरानी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। ड्रोन सर्वे से इकट्ठा किया गया डेटा परियोजनाओं की असल प्रगति और अधिकारियों द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के बीच अंतर का पता लगाने में मदद करेगा।
इससे विभाग यह पता लगा सकेगा कि काम कहाँ धीमा चल रहा है, किन रुकावटों की वजह से काम में देरी हो रही है और क्या गुणवत्ता से जुड़ी कोई समस्या है। विभाग ने अधिकारियों से ड्रोन सर्वे रिपोर्ट के साथ जियो-टैग की गई तस्वीरें, वीडियो फुटेज और किए गए सुधारात्मक उपायों की जानकारी जमा करने को कहा है। मल्लिक ने अपने पत्र में कहा कि बाद में ये रिपोर्ट CWC को भेजी जाएंगी। एक बार लागू होने के बाद, यह सिस्टम पक्का करेगा कि सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी सिर्फ़ कागज़ी कार्रवाई और प्रोग्रेस रिपोर्ट तक ही सीमित न रहे, बल्कि प्रोजेक्ट साइट की असल स्थितियों पर भी आधारित हो। उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और उसे लागू करने की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।
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