भुवनेश्वर: वरिष्ठ बीजद नेता और पूर्व मंत्री प्रताप जेना को बड़ी राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2021 महांगा दोहरे हत्याकांड मामले में उड़ीसा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया।

शीर्ष अदालत की न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भगवान जगन्नाथ और महांगा के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बीजद उपाध्यक्ष ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं।

जेना ने कहा, "मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उड़ीसा उच्च न्यायालय ने मुझे राहत दी थी, भले ही भाजपा और कांग्रेस के दबाव के बाद जानबूझकर मेरा नाम मामले में घसीटा गया था। अब सच्चाई सामने आ गई है।"

हत्या का मामला 2 जनवरी, 2021 का है, जब भाजपा नेता और महांगा ब्लॉक अध्यक्ष कुलमणि बराल और उनके सहयोगी दिब्यसिंघा बराल की मोटरसाइकिल पर घर लौटते समय बदमाशों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी।

हालांकि शुरुआती एफआईआर में जेना का नाम नहीं था, लेकिन उनका नाम न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी), सालेपुर के बाद शामिल किया गया था, जिसमें प्रथम दृष्टया कुलमणि बराल के बेटे की विरोध याचिका के बाद हत्या के आरोपी के रूप में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

 

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