Odisha : स्कूल किताबों में 1,678 गलतियां मिलने पर क्राइम ब्रांच जांच के आदेश

Update: 2026-07-11 09:45 GMT

भुवनेश्वर : ओडिशा में कक्षा पहली से आठवीं तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में गलतियां सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को किताबों की तैयारी और प्रकाशन प्रक्रिया की आपराधिक जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के निदेशक को क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक के पास एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए यह कदम उठाया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पाठ्यपुस्तकों में इतनी बड़ी संख्या में गलतियां कैसे रह गईं।

क्राइम ब्रांच करेगी पूरे मामले की जांच

राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच जांच का फैसला लिया है। इसके तहत यह पता लगाया जाएगा कि किताबों के निर्माण, समीक्षा और प्रकाशन के दौरान किन स्तरों पर लापरवाही हुई।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की जानबूझकर लापरवाही या नियमों की अनदेखी के कारण छात्रों तक गलत जानकारी पहुंची।

मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद SCERT की ओर से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

1,678 गलतियों के बाद उठा विवाद

यह पूरा मामला तब सामने आया जब राज्य में कक्षा पहली से आठवीं तक के लिए जारी नई पाठ्यपुस्तकों में करीब 1,678 गलतियां पाई गईं। इन गलतियों में भाषा, तथ्यात्मक जानकारी और अन्य शैक्षणिक त्रुटियां शामिल होने की बात सामने आई।

पाठ्यपुस्तकों में गलतियों को लेकर विपक्षी दलों और शिक्षाविदों ने सरकार की आलोचना की थी। उनका कहना था कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामलों में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।

हाई लेवल कमेटी ने की थी जांच

इन गड़बड़ियों के कारणों का पता लगाने के लिए राज्य सरकार ने पहले विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।

समिति ने पूरे मामले की समीक्षा की और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।

SCERT के पूर्व निदेशक समेत अधिकारियों पर कार्रवाई

सरकार ने कार्रवाई करते हुए SCERT के पूर्व निदेशक मनोज पाधी और तीन असिस्टेंट डायरेक्टर्स को निलंबित कर दिया था।

इसके अलावा छह अन्य असिस्टेंट डायरेक्टर्स के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला

राज्य सरकार ने कहा है कि स्कूल की किताबें छात्रों के ज्ञान और भविष्य की नींव होती हैं। ऐसे में उनमें गलत जानकारी का होना गंभीर विषय है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों के निर्माण और प्रकाशन में ऐसी गलतियां दोबारा न हों। इसके लिए समीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है।

विपक्ष और शिक्षाविदों ने उठाए थे सवाल

किताबों में गलतियों का मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा था। उनका आरोप था कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

वहीं, शिक्षाविदों ने भी कहा था कि बच्चों को दी जाने वाली पाठ्य सामग्री पूरी तरह प्रमाणिक और जांची-परखी होनी चाहिए।

सरकार ने जताई सख्ती

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार अब क्राइम ब्रांच की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

फिलहाल क्राइम ब्रांच की जांच शुरू होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पाठ्यपुस्तकों में इतनी बड़ी संख्या में गलतियां किस स्तर पर हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

राज्य सरकार ने कहा है कि छात्रों को सही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। आने वाले समय में किताबों की समीक्षा और प्रकाशन प्रक्रिया में सुधार के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं।

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