भुवनेश्वर : सस्टेनेबल अर्बनाइजेशन और क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की दिशा में ओडिशा सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट (H&UD) विभाग ने लो कार्बन कंस्ट्रक्शन मटीरियल और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की पहल शुरू की है।
इस उद्देश्य से ओडिशा अर्बन एकेडमी (OUA), IIT भुवनेश्वर और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के बीच एक महत्वपूर्ण तीन-तरफा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का लक्ष्य पर्यावरण के अनुकूल निर्माण तकनीकों को बढ़ावा देना, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा भविष्य के लिए तैयार शहरों के विकास को गति देना है।
सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को मिलेगा बढ़ावा
इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कम कार्बन उत्सर्जन वाले निर्माण सामग्री, आधुनिक तकनीकों और टिकाऊ निर्माण प्रक्रियाओं पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य शहरी विकास में पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और ऐसे समाधान विकसित करना है, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकें।
ओडिशा सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में टिकाऊ निर्माण बेहद जरूरी है। इस पहल से राज्य में ग्रीन बिल्डिंग, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नए प्रयोगों को बढ़ावा मिलेगा।
OUA, IIT भुवनेश्वर और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स की साझेदारी
MoU पर ओडिशा अर्बन एकेडमी के निदेशक सुवेंदु साहू, IIT भुवनेश्वर के स्कूल ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोफेसर दिनाकर पासला और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के CEO शशंत पटारा ने हस्ताक्षर किए।
कार्यक्रम के दौरान ओडिशा के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्रा और विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी भी मौजूद रहीं।
यह साझेदारी रिसर्च, तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके जरिए शहरी निकायों, इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को टिकाऊ निर्माण के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
रिसर्च और इनोवेशन पर रहेगा फोकस
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का मुख्य उद्देश्य लो कार्बन निर्माण सामग्री और तकनीकों पर शोध करना होगा। इसके तहत ऐसे उत्पादों और प्रक्रियाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जिनसे निर्माण क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण क्षेत्र दुनिया में कार्बन उत्सर्जन के बड़े स्रोतों में शामिल है। ऐसे में पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों को अपनाना समय की जरूरत बन गया है।
इस केंद्र के माध्यम से नई तकनीकों का परीक्षण, उनके उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।
शहरों को बनाया जाएगा क्लाइमेट रेजिलिएंट
ओडिशा सरकार का विजन ऐसे शहर विकसित करना है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने में सक्षम हों। इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए शहरी विकास योजनाओं में जलवायु अनुकूल उपायों को शामिल करने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में बाढ़, गर्मी और अन्य प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने वाले शहरों के निर्माण में सहायता मिलेगी।
क्षमता निर्माण में भी मिलेगी मदद
इस पहल के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा। इनके माध्यम से सरकारी अधिकारियों, शहरी योजनाकारों और निर्माण क्षेत्र के पेशेवरों को नई तकनीकों और टिकाऊ निर्माण पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि केवल नई तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे जमीन पर लागू करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन भी जरूरी है।
ग्रीन और भविष्य के लिए तैयार ओडिशा का लक्ष्य
ओडिशा सरकार ने इस पहल को राज्य के ग्रीन और सस्टेनेबल विकास के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, यह साझेदारी राज्य में पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास को नई दिशा देगी।
IIT भुवनेश्वर की तकनीकी विशेषज्ञता, OUA की शहरी विकास क्षेत्र की समझ और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के अनुभव के साथ यह सेंटर टिकाऊ निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इस समझौते के बाद उम्मीद है कि ओडिशा में आने वाले समय में कम कार्बन वाले निर्माण मॉडल को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के शहर अधिक हरित, सुरक्षित और जलवायु परिवर्तन के लिए तैयार बन सकेंगे।