Patiala ड्रग तस्करी और जबरन वसूली रैकेट से जुड़े मामलों में नाम आने के बाद 2019 से फरार चल रहे बर्खास्त AIG रज्जित सिंह ने पटियाला पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है, जिससे लगभग छह साल से चल रही उनकी फरारी खत्म हो गई है। DGP गौरव यादव ने 'द ट्रिब्यून' को पुष्टि की कि सिंह को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले हुई है, जिसमें AAP सरकार राज्य में ड्रग्स के खिलाफ अपनी कार्रवाई को प्रमुखता से दिखा रही है। विपक्षी दलों ने सिंह की गिरफ्तारी में देरी पर बार-बार सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि सरकार ड्रग्स के कारोबार से जुड़े कथित वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में बर्खास्त इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के साथ कथित मिलीभगत पाए जाने के बाद सिंह को अप्रैल 2019 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इंदरजीत सिंह पर ड्रग तस्करी और जबरन वसूली नेटवर्क में शामिल होने का आरोप था। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, जांच में इंदरजीत सिंह और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संबंध में रज्जित सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
इसके बाद 2019 में सिंह के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए - एक विजिलेंस ब्यूरो द्वारा आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों पर और दूसरा स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा जबरन वसूली, लोगों को ड्रग्स के मामलों में झूठा फंसाने और कथित ड्रग तस्करों को बचाने के आरोपों पर। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद वे भूमिगत हो गए थे। एजेंसियों द्वारा उन्हें खोजने के प्रयासों के बीच उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। इंदरजीत सिंह से जुड़े कथित पुलिस-ड्रग्स नेक्सस (मिलीभगत) की व्यापक जांच में उनका नाम प्रमुखता से सामने आया था। हाई कोर्ट ने पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कथित मिलीभगत की जांच के निर्देश दिए थे, जबकि जांच में रज्जित सिंह से जुड़ी वित्तीय संपत्तियों की भी पड़ताल की गई थी। सिंह के सरेंडर की परिस्थितियों और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में और जानकारी का इंतजार है। यह एक डेवलपिंग स्टोरी है और अधिक जानकारी मिलने पर इसे अपडेट किया जाएगा।