चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला करीब 102.50 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन निर्यात में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अरोड़ा को 9 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्होंने नियमित जमानत के लिए अदालत का रुख किया था, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी।जस्टिस कुलदीप तिवारी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता नियमित जमानत पाने के लिए पर्याप्त ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर पाए। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन के विवरण पर विचार करने के बाद जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।
₹102.50 करोड़ के मोबाइल निर्यात से जुड़ा मामला
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह मामला हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) नामक कंपनी से जुड़ा है। यह कंपनी मुख्य रूप से रियल एस्टेट कारोबार से संबंधित रही है। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने वर्ष 2023 में मोबाइल फोन के निर्यात का कारोबार शुरू किया और 2024 में इस गतिविधि को बंद कर दिया।ईडी का दावा है कि इस अवधि में कंपनी ने संयुक्त अरब अमीरात स्थित दो कंपनियों को करीब 102.50 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन निर्यात का रिकॉर्ड दिखाया। एजेंसी इन कारोबारी लेनदेन और इनके पीछे की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों की जांच कर रही है।
UAE की दो कंपनियों से जुड़े लेनदेन पर सवाल
मामले में संयुक्त अरब अमीरात की फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO और ड्रैगन ग्लोबल FZCO नामक दो कंपनियों का उल्लेख किया गया है। ईडी के अनुसार, हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने इन्हीं कंपनियों को मोबाइल फोन निर्यात करने का दावा किया था।जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष संबंधित कंपनी, उसके आपूर्तिकर्ताओं और विदेशी खरीदारों के बीच कथित कारोबारी संबंधों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए। इन दस्तावेजों को मामले की जांच और वित्तीय लेनदेन की प्रकृति समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया।हालांकि, इन लेनदेन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
पहले भी खारिज हो चुकी है जमानत याचिका
संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका इससे पहले 15 जून 2026 को गुरुग्राम की विशेष अदालत ने भी खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, 16 अक्टूबर को हाई कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली। अरोड़ा फिलहाल गुरुग्राम की भोंडसी जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
कंपनी ने ईडी के आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने निर्यात में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का दावा है कि उसने वास्तविक मोबाइल फोन का निर्यात किया और संबंधित कारोबारी लेनदेन के दस्तावेज उपलब्ध हैं। कंपनी ने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा होने की बात कही है।
विस्तृत आदेश से स्पष्ट होंगे फैसले के आधार
हाई कोर्ट के फैसले के बाद संजीव अरोड़ा को फिलहाल न्यायिक हिरासत से राहत नहीं मिली है। हालांकि, अदालत का विस्तृत आदेश उपलब्ध होने के बाद जमानत खारिज करने के कानूनी आधार और स्पष्ट होंगे।मामले में जांच एजेंसी के आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है। जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ आरोपों का सिद्ध होना नहीं है।