खालसा मार्च में शामिल होंगे सिख नेता और प्रमुख चेहरे

Update: 2026-07-23 16:34 GMT

पंजाब: अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब से 24 जुलाई को ‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ का शुभारंभ किया जाएगा। श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के मीरी-पीरी दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले इस विशेष मार्च में सिख पंथ की कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। इस धार्मिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य गुरमति का प्रचार-प्रसार करना और संगत को श्री अकाल तख्त साहिब के सिद्धांतों व आदेशों से अवगत कराना है।

धर्म प्रचार कमेटी के सचिव गुरिंदर सिंह मथरेवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मार्च श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के आदेशानुसार निकाला जा रहा है। इसमें सिंह साहिबान, विभिन्न तख्तों के जत्थेदार, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष और पंथ की अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां शामिल होंगी।

उन्होंने बताया कि मार्च की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब के भोग और गुरमति समागम के बाद होगी। इसके बाद सुबह करीब 9 बजे श्री अकाल तख्त साहिब से खालसा मार्च रवाना होगा। यह मार्च श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई और पंच प्यारों के नेतृत्व में निकाला जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, इस मार्च के माध्यम से सिख इतिहास, गुरु साहिबानों की शिक्षाओं और खालसा परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। मार्च के दौरान विशेष बसों के माध्यम से गुरु साहिबान और शहीद सिंहों से जुड़े ऐतिहासिक शस्त्रों के दर्शन भी करवाए जाएंगे। इससे संगत को सिख विरासत और बलिदान के इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

मार्च के साथ चलने वाले वाहनों पर सिख इतिहास, धार्मिक परंपराओं और संघर्षों को दर्शाने वाले पोस्टर भी लगाए जाएंगे। इन पोस्टरों के जरिए नई पीढ़ी को सिख धर्म के गौरवशाली इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।

‘मीरी-पीरी’ की अवधारणा सिख इतिहास में विशेष महत्व रखती है। छठे सिख गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने मीरी और पीरी की परंपरा स्थापित की थी। इसमें आध्यात्मिक और सांसारिक जिम्मेदारियों के संतुलन का संदेश दिया गया है। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यह खालसा मार्च आयोजित किया जा रहा है।

मार्च का पहला पड़ाव तरनतारन जिले में होगा। 24 जुलाई को श्री अकाल तख्त साहिब से रवाना होने के बाद यह हॉल गेट, भंडारी पुल, पुतलीघर, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, छेहरटा, खासा, घरिंडा, चोगावां, अटारी और सराय अमानत खां सहित कई गांवों और कस्बों से होकर गुजरेगा।

इसके बाद मार्च गुरुद्वारा बीड़ बाबा बुड्ढा साहिब, ठट्टा (तरनतारन) पहुंचेगा, जहां रात का विश्राम किया जाएगा। अगले दिन यानी 25 जुलाई को यह मार्च तरनतारन साहिब के लिए आगे रवाना होगा।

आयोजकों का कहना है कि इस खालसा मार्च के जरिए संगत को एकजुट करने, गुरमति विचारधारा को मजबूत करने और श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा व सिद्धांतों के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस आयोजन को लेकर सिख समुदाय में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

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