जयपुर : राजस्थान सरकार ने पुलिस व्यवस्था और जनता के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम बदलाव किया है। सरकार ने ‘राजस्थान पुलिस नियम, 2008’ में संशोधन करते हुए उस प्रावधान को हटा दिया है, जिसके तहत राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों के सदस्य कम्युनिटी लाइज़न ग्रुप्स (CLGs) का हिस्सा नहीं बन सकते थे।
यह संशोधन 20 जुलाई को जारी सरकारी गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से लागू किया गया। इसके बाद अब राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी CLG की सदस्यता के लिए पात्र हो सकेंगे।
CLG में राजनीतिक सदस्यों पर लगी रोक हटी
राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के तहत बनाए गए कम्युनिटी लाइज़न ग्रुप्स का उद्देश्य पुलिस और आम नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। ये समूह स्थानीय स्तर पर पुलिस को सूचनाएं उपलब्ध कराने, अपराधों की रोकथाम में सहयोग करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद करते हैं।
पहले नियमों में एक प्रावधान था, जिसके तहत राजनीतिक पार्टियों और उनसे जुड़े संगठनों के सदस्यों को CLG में शामिल होने से रोक दिया गया था। सरकार ने अब इस प्रावधान को समाप्त कर दिया है।
गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, CLG सदस्यता से जुड़े नियम के सब-रूल (5) के क्लॉज (C) को हटा दिया गया है। इस बदलाव के बाद राजनीतिक दलों के सदस्य भी इन समूहों में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
अन्य पात्रता नियमों में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल राजनीतिक सदस्यता से जुड़ी पाबंदी हटाई गई है। CLG सदस्यों के लिए तय अन्य सभी योग्यता और अयोग्यता के नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
ऐसे लोग जो किसी अपराध में अदालत से दोषी ठहराए जा चुके हैं, वे CLG का हिस्सा नहीं बन सकेंगे। इसी तरह जिन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, उन्हें भी सदस्यता नहीं दी जाएगी।
इसके अलावा, जिन व्यक्तियों पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने, अपराधियों से संबंध रखने या कानून व्यवस्था के लिए खतरा बनने का संदेह है, वे भी CLG सदस्य बनने के पात्र नहीं होंगे।
संपत्ति विवाद वाले लोग भी रहेंगे बाहर
नियमों के तहत ऐसे लोगों को भी CLG की सदस्यता से बाहर रखा जाएगा, जो संपत्ति, जमीन या अन्य दीवानी विवादों में शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि CLG में शामिल होने वाले सदस्य समाज में भरोसेमंद छवि रखने वाले और कानून व्यवस्था में सहयोग करने वाले होने चाहिए। इसलिए आपराधिक पृष्ठभूमि या विवादों से जुड़े लोगों को अब भी सदस्यता से दूर रखा जाएगा।
पुलिस और जनता के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश
कम्युनिटी लाइज़न ग्रुप्स पुलिसिंग व्यवस्था में जनता की भागीदारी बढ़ाने का एक माध्यम हैं। इन समूहों के जरिए स्थानीय लोगों से जुड़ी जानकारियां पुलिस तक पहुंचती हैं और अपराध नियंत्रण में मदद मिलती है।
CLG सदस्य अपने क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देते हैं और सामाजिक स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करते हैं।
संशोधन पर राजनीतिक चर्चा की संभावना
सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक क्षेत्र में भी चर्चा शुरू हो सकती है। अब तक राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को CLG से दूर रखने का उद्देश्य इन समूहों को राजनीतिक प्रभाव से अलग रखना माना जाता था।
वहीं, सरकार के इस बदलाव के समर्थकों का तर्क हो सकता है कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से पुलिस और जनता के बीच संबंध मजबूत होंगे।
कानून व्यवस्था में नागरिक भागीदारी पर जोर
राजस्थान सरकार का यह कदम सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है। बदलते समय में पुलिस विभाग अपराध रोकने और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी को महत्वपूर्ण मानता है।
CLG जैसे मंचों के माध्यम से पुलिस को स्थानीय स्तर पर बेहतर जानकारी मिल सकती है और समस्याओं का समाधान जल्दी किया जा सकता है।