जयपुर: दिल्ली में एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ कथित मारपीट और अभद्रता के मामले ने राजस्थान की सियासत में नया उबाल ला दिया है। रितु बराला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल चंचल यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर कांग्रेस ने जयपुर में मोर्चा खोल दिया है। सोमवार शाम से शुरू हुआ विरोध मंगलवार दोपहर तक भी जारी रहा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास सहित कई नेता पुलिस कमिश्नरेट के भीतर रातभर धरने पर बैठे रहे। वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाहर प्रदर्शन कर नारेबाजी की।

कांग्रेस नेताओं की मांग है कि राजस्थान की रहने वाली रितु बराला की शिकायत पर जयपुर में जीरो नंबर की प्राथमिकी दर्ज की जाए, ताकि मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सके। नेताओं का आरोप है कि पुलिस शिकायत दर्ज करने में टालमटोल कर रही है।

दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रदर्शन के चलते कमिश्नरेट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और बैरिकेडिंग की गई। कार्यकर्ताओं को पीछे हटाने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई।

सोमवार शाम करीब 6:15 बजे गोविंद सिंह डोटासरा रितु बराला और अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे थे। इससे पहले रितु बराला ने मोती डूंगरी थाने में शिकायत देकर संबंधित महिला पुलिसकर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, थाने से उन्हें पुलिस कमिश्नरेट जाने के लिए कहा गया।

कमिश्नरेट पहुंचने के बाद पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल से मुलाकात नहीं होने पर डोटासरा ने फोन पर उनसे बात की और मामले को व्यक्तिगत मुद्दा नहीं बनाने की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि प्राथमिकी दर्ज होने तक वे वहां से नहीं हटेंगे। इसके बाद डोटासरा, खाचरियावास सहित अन्य नेताओं ने कमिश्नरेट परिसर में ही रात गुजारी। मंगलवार सुबह नेता वहीं चाय पीते नजर आए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि पुलिस दबाव में काम कर रही है और राजस्थान की बेटी को न्याय दिलाने के मामले में कानून की पालना नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता भूखे-प्यासे धरने पर बैठे हैं और प्राथमिकी दर्ज होने तक अपना विरोध जारी रखेंगे।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब प्रदेश में जीरो एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है, तो शिकायत दर्ज करने में परेशानी क्यों हो रही है। उन्होंने मांग की कि पहले प्राथमिकी दर्ज की जाए और उसके बाद पुलिस निष्पक्ष जांच करे।

पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने पुलिस कमिश्नर की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं गृह विभाग की जिम्मेदारी संभालते हैं, इसलिए मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शन के दौरान टकराव की स्थिति बनती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

इधर, कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार नारेबाजी करते रहे। पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते कमिश्नरेट में आमजन की आवाजाही भी प्रभावित हुई और गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहे के आसपास यातायात जाम की स्थिति बन गई।

उल्लेखनीय विवाद की शुरुआत 13 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एनएसयूआई के प्रदर्शन के दौरान हुई थी। रितु बराला का आरोप है कि प्रदर्शन के बाद उन्हें और अन्य कार्यकर्ताओं को जबरन बस में बैठाकर कनॉट प्लेस पुलिस थाने ले जाया गया, जहां महिला पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने बाल खींचने, थप्पड़ मारने, गर्दन दबाने और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट पहुंचाने के आरोप भी लगाए हैं।

रितु के अनुसार, घटना के बाद उन्हें दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था और 14 अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी मिली। बाद में उन्होंने राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी अपना पक्ष रखा था। अब इस मामले में राजस्थान कांग्रेस ने प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है।

फिलहाल कांग्रेस नेता जीरो एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़े हैं।

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