गुरु पूर्णिमा पर माहेश्वरी महिला संगठन ने किया गुरुजनों का सम्मान, दिव्यांग बच्चों संग बांटी खुशियां

Update: 2026-07-29 14:28 GMT

Bhilwara  भीलवाड़ा  । जिला माहेश्वरी महिला संगठन भीलवाड़ा द्वारा बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सेवाश्रम बौद्धिक दिव्यांग विशेष विद्यालय, चंद्रशेखर आजाद नगर में श्रद्धा, सेवा और सम्मान के भाव के साथ ‘गुरु वंदन-अभिनंदन समारोह’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के गुरुजनों का सम्मान कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई तथा दिव्यांग बच्चों के साथ सेवा गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदन के साथ हुई। विद्यालय के बौद्धिक दिव्यांग बच्चों ने मंत्र एवं श्लोक वाचन कर सभी को भावविभोर कर दिया। इसके बाद बच्चों ने योग एवं प्राणायाम की प्रेरणादायी प्रस्तुति दी। संगठन की ओर से सभी बच्चों को एक समय का भोजन कराया गया तथा स्टेशनरी सामग्री वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।



 


समारोह की मुख्य अतिथि अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन की कोषाध्यक्ष ममता मोदानी तथा विशिष्ट अतिथि दक्षिण राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी महिला संगठन की प्रदेशाध्यक्ष सीमा कोगटा रहीं। सेवाश्रम बौद्धिक दिव्यांग विशेष विद्यालय, अध्यक्षा मधु काबरा ने सेवाश्रम की स्थापना के उद्देश्य, दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों तथा सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। जिलााध्यक्ष भारती बाहेती ने बताया कि मुख्य अतिथि ममता मोदानी ने सेवा भाव से संचालित विद्यालय की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए संचालक मंडल के कार्यों की प्रशंसा की। कार्यक्रम में सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन जिला सचिव निशा कांकाणी ने किया। जिला प्रकल्प प्रमुख डॉ. चेतना जागेटिया तथा बाल एवं ग्राम विकास समिति की जिला सह-संयोजिका रेखा लढा ने उपस्थित सभी अतिथियों, गुरुजनों एवं संगठन की बहनों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष मोना डाड, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य मान कंवर काबरा, बाल एवं ग्राम विकास समिति की सह प्रभारी मधु काबरा, जिला उपाध्यक्ष राखी राठी, जिला संयुक्त मंत्री रीना डाड, मीनू रंधावर, वीणा मोदी, विनीता तोषणीवाल, वंदना नवाल, अनु मोदी, राधा न्याती, मधु समदानी, रंजना बिड़ला, चंदा जागेटिया, सुमन असावा एवं ललिता राठी सहित संगठन की अनेक सदस्याएं उपस्थित रहीं। सभी की गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम सेवा, संस्कार और गुरु सम्मान का प्रेरक उदाहरण बन गया।

Tags:    

Similar News