चेन्नई: CB-CID ने पाया है कि जेल के नियमों का उल्लंघन करते हुए, सजा काट रहे कैदियों को जेल उप महानिरीक्षक (DIG) के आवास पर घरेलू काम करने के लिए लगाया गया था।

इस बीच, एजेंसी की जांच में ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं मिले जो वेल्लोर केंद्रीय जेल के अधिकारियों के खिलाफ कैदी एस. शिवकुमार द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों को साबित कर सकें।

10 मार्च, 2026 को वेल्लोर की न्यायिक मजिस्ट्रेट III अदालत में सौंपी गई अपनी अंतिम रिपोर्ट में, CB-CID ने जेल अधिकारियों और वार्डरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। इन लोगों ने तमिलनाडु जेल नियमावली के नियमों का उल्लंघन करते हुए, कैदियों को जेल DIG आर. राजलक्ष्मी के आवास पर खाना पकाने, साफ-सफाई, कपड़े धोने और बागवानी जैसे कामों में लगाया था।

रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि प्रताड़ना के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कथित मारपीट को लेकर शिवकुमार और अन्य कैदियों के बयानों में काफी विरोधाभास था। वहीं, दो मेडिकल बोर्डों द्वारा की गई जांच सहित अन्य मेडिकल परीक्षणों में ऐसी कोई चोट नहीं मिली जो कथित प्रताड़ना की पुष्टि करती हो।

 यह मामला शिवकुमार की मां एस. कलावती द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका पर आधारित था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जेल अधिकारियों ने उनके बेटे को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है। वेल्लोर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांच के बाद, उच्च न्यायालय ने आपराधिक मामला दर्ज करने और CB-CID से जांच कराने का आदेश दिया था।

जांच टीम ने 64 गवाहों से पूछताछ की और मेडिकल रिकॉर्ड, जेल रजिस्टर तथा वीडियो फुटेज सहित 93 दस्तावेजों की जांच की। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि शिवकुमार को जेल के एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में स्थानांतरित करने के कारणों को जेल के नियमों के अनुसार दर्ज नहीं किया गया था।

 

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