कावेरी बेसिन को BJP का भरोसा, नियमों से होगा फैसला

Update: 2026-07-29 08:08 GMT

चेन्नई। मेकेदातु परियोजना को लेकर जारी बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कावेरी बेसिन के लोगों से चिंता न करने की अपील की है। पार्टी ने कहा है कि केंद्र सरकार कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के नियमों और देश के कानूनों का पूरी तरह पालन करती है। बीजेपी ने भरोसा दिलाया कि ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे कावेरी नदी के पानी के बंटवारे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

तमिलनाडु बीजेपी ने मेकेदातु परियोजना को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जल विवादों से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रही है। पार्टी का कहना है कि कावेरी बेसिन से जुड़े राज्यों के हितों को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जाती है।

तमिलनाडु बीजेपी के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा कि पार्टी मेकेदातु परियोजना के मामले में केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय के लगातार तथा जिम्मेदार रुख का पूरी तरह समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होने देगी और जल बंटवारे से जुड़े सभी फैसले नियमों के अनुसार ही लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि कावेरी नदी से जुड़े मुद्दे लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं और इस मामले में भावनाओं के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया का पालन करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की भूमिका सभी राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने की है और वह इसी जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है।

क्या है मेकेदातु परियोजना

मेकेदातु परियोजना कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य कावेरी नदी पर जलाशय का निर्माण करना है। इस परियोजना को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। कर्नाटक का कहना है कि परियोजना से पेयजल की जरूरतों को पूरा करने और बिजली उत्पादन में मदद मिलेगी, जबकि तमिलनाडु को आशंका है कि इससे राज्य को मिलने वाले कावेरी जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

कावेरी नदी जल बंटवारे का मुद्दा कई दशकों से दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण रहा है। इस मामले में न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर कई फैसले लिए गए हैं। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना भी इसी विवाद के समाधान और जल वितरण की निगरानी के लिए की गई थी।

बीजेपी ने दोहराया केंद्र का रुख

बीजेपी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा कि केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है कि सभी निर्णय कानून और संबंधित प्राधिकरणों के नियमों के तहत ही लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र किसी भी ऐसी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिससे राज्यों के बीच निर्धारित जल बंटवारे की व्यवस्था प्रभावित हो।

उन्होंने कहा कि कावेरी बेसिन के लोगों को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी।

जल विवाद पर सियासत जारी

मेकेदातु परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक की राजनीति में समय-समय पर बयानबाजी होती रही है। तमिलनाडु के राजनीतिक दल लगातार इस परियोजना का विरोध करते रहे हैं और उनका कहना है कि इससे राज्य के किसानों और जल सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। वहीं, कर्नाटक सरकार परियोजना को राज्य की जरूरतों से जोड़ते हुए इसके समर्थन में रही है।

इस विवाद के बीच बीजेपी ने केंद्र सरकार की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार सभी राज्यों के अधिकारों और हितों का ध्यान रख रही है। पार्टी ने कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर समाधान की दिशा में काम करने की जरूरत है।

कावेरी बेसिन के लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश

बीजेपी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मेकेदातु परियोजना को लेकर फिर से चर्चा तेज हुई है। पार्टी ने अपने बयान के माध्यम से कावेरी बेसिन के लोगों को आश्वस्त करने का प्रयास किया है कि केंद्र सरकार किसी भी फैसले में जल बंटवारे के नियमों और राज्यों के हितों की अनदेखी नहीं करेगी।

पार्टी का कहना है कि देश में जल संसाधनों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है। केंद्र सरकार भी इसी नीति के तहत आगे बढ़ रही है।

मेकेदातु परियोजना पर अंतिम निर्णय से पहले सभी संबंधित पक्षों की चिंताओं, तकनीकी पहलुओं और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा। फिलहाल बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता कावेरी बेसिन के लोगों के हितों की सुरक्षा और जल प्रबंधन व्यवस्था को बनाए रखना है।

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