नागापट्टिनम: तमिलनाडु के नागापट्टिनम शहर में नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पेरिया कड़ाई स्ट्रीट पर करीब 2.23 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित आधुनिक शॉपिंग मॉल चार वर्षों से तैयार होने के बावजूद अब तक शुरू नहीं हो सका है। इस कारण स्थानीय व्यापारियों, आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने नगर पालिका प्रशासन पर सार्वजनिक धन की बर्बादी का आरोप लगाते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका ने पुराने आज़ाद मार्केट को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से इस शॉपिंग मॉल का निर्माण कराया था। उम्मीद थी कि नए परिसर में व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और ग्राहकों को एक सुव्यवस्थित बाजार उपलब्ध होगा। लेकिन निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी मॉल का उद्घाटन नहीं होने से पूरा परिसर उपयोग के बिना पड़ा है।
नागाई नगर पालिका की मुख्य शॉपिंग स्ट्रीट के बीचों-बीच स्थित आज़ाद मार्केट शहर की पहचान माना जाता था। यह बाजार 70 से अधिक वर्षों तक स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। एक बड़े टिन शेड के नीचे मछली, बकरी और चिकन के मांस की दुकानें संचालित होती थीं, जबकि बाहर की ओर किराना, सब्जी और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की दुकानें लगती थीं। एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सामान उपलब्ध होने के कारण यह बाजार आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय था।
इस बाजार से न केवल शहर के लोग बल्कि आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते थे। विशेष रूप से नागापट्टिनम के आसपास के मछली पकड़ने वाले गांवों की 50 से अधिक महिलाएं यहां प्रतिदिन मछली और रतालू बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। इसके अलावा छोटे दुकानदार, मजदूर, परिवहन कर्मी और अन्य व्यवसायों से जुड़े लोगों सहित 500 से अधिक लोगों की आजीविका सीधे तौर पर इस बाजार पर निर्भर थी।
नगर पालिका ने पुराने बाजार को हटाकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त शॉपिंग मॉल बनाने की योजना तैयार की थी। इसके तहत करोड़ों रुपये खर्च कर बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर का निर्माण कराया गया। अधिकारियों का दावा था कि इससे व्यापारियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलेगा तथा शहर के व्यापार को नई गति मिलेगी। हालांकि निर्माण पूरा होने के बाद भी यह परियोजना शुरू नहीं हो सकी।
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि उद्घाटन में लगातार हो रही देरी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई दुकानदारों को अस्थायी स्थानों पर व्यवसाय करना पड़ रहा है, जहां ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम है। इससे उनकी आमदनी प्रभावित हुई है और कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
मछली विक्रेताओं का कहना है कि पुराने बाजार में उन्हें स्थायी ग्राहक मिलते थे, लेकिन बाजार बंद होने के बाद उनकी बिक्री घट गई है। उनका कहना है कि आधुनिक बाजार बनने के बावजूद उसका उपयोग न होना प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। उनका मानना है कि यदि मॉल समय पर चालू हो जाता तो व्यापार पहले से बेहतर हो सकता था।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि खर्च कर निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, तो उसे वर्षों तक बंद रखना करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना की उचित योजना, समन्वय और समयबद्ध क्रियान्वयन के अभाव में यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
नागरिकों ने मांग की है कि नगर पालिका यह स्पष्ट करे कि आखिर किन कारणों से चार वर्षों से शॉपिंग मॉल का संचालन शुरू नहीं हो पाया। साथ ही परियोजना में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि भवन लंबे समय तक खाली पड़ा रहेगा तो उसके रखरखाव पर भी अतिरिक्त खर्च आएगा और संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहेगी।
शहर के व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि शॉपिंग मॉल को शीघ्र शुरू कर दिया जाए तो न केवल व्यापारियों को राहत मिलेगी, बल्कि नगर पालिका को भी दुकानों के किराये और अन्य शुल्कों के माध्यम से नियमित राजस्व प्राप्त होगा। इससे शहर की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से बंद पड़े इस शॉपिंग मॉल को जल्द से जल्द आम जनता और व्यापारियों के लिए खोला जाए, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच सके।
फिलहाल नागापट्टिनम का यह अधूरा सपना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर जहां शहर के व्यापारी बेहतर सुविधाओं वाले बाजार का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर करदाताओं का पैसा वर्षों से निष्क्रिय पड़ी परियोजना में फंसा हुआ है। अब सभी की निगाहें नगर पालिका और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस लंबे समय से लंबित परियोजना को कब शुरू कर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरते हैं।