तमिलनाडु: कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु में जारी राजनीतिक हलचल के बीच राज्य के मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य विधानसभा पहले ही सभी राजनीतिक दलों की सहमति और भागीदारी से एक विस्तृत प्रस्ताव पारित कर चुकी है। ऐसे में अलग से सर्वदलीय बैठक बुलाने की आवश्यकता नहीं है।
कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हाल के घटनाक्रमों के बाद राज्य की कई राजनीतिक पार्टियों ने सरकार से मांग की थी कि इस मामले पर सभी दलों को साथ लेकर एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाए, ताकि आगे की रणनीति पर चर्चा की जा सके।
राज्य की प्रमुख विपक्षी और अन्य राजनीतिक पार्टियों ने इस मांग को उठाया था। इनमें डीएमके, एआईएडीएमके, पीएमके और वीसीके जैसी पार्टियां शामिल हैं। इन दलों का कहना है कि कावेरी जल विवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य की सभी राजनीतिक ताकतों को एक मंच पर आकर चर्चा करनी चाहिए और केंद्र सरकार के समक्ष एक मजबूत पक्ष रखा जाना चाहिए।
हालांकि, मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने इन मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर पहले ही सभी दलों को साथ लेकर कदम उठा चुकी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों की सहमति से प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें राज्य के हितों और कावेरी जल अधिकारों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया गया है।
मंत्री ने कहा कि विधानसभा में पारित प्रस्ताव राज्य की सामूहिक भावना को दर्शाता है और इसमें सभी दलों की भागीदारी रही है। उन्होंने विपक्ष की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सदन में पहले ही व्यापक चर्चा हो चुकी है और सभी दलों की सहमति से निर्णय लिया जा चुका है, तो अलग से बैठक बुलाने का औचित्य नहीं बनता।
कावेरी जल विवाद तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। राज्य की सरकारें लगातार यह मांग करती रही हैं कि कावेरी नदी के पानी में तमिलनाडु के हिस्से को सुनिश्चित किया जाए। वहीं, कर्नाटक भी अपने जल संसाधनों और जरूरतों का हवाला देते हुए अपने पक्ष को सामने रखता रहा है।
कावेरी जल प्रबंधन को लेकर दोनों राज्यों के बीच कई बार तनाव की स्थिति पैदा हुई है। इस मामले में न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर भी कई फैसले और व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, लेकिन समय-समय पर पानी के वितरण को लेकर विवाद फिर सामने आ जाता है।
विपक्षी दलों का तर्क है कि राज्य सरकार को इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक करनी चाहिए। उनका कहना है कि कावेरी जैसे अंतरराज्यीय विवाद में तमिलनाडु का पक्ष मजबूत तरीके से रखने के लिए सभी दलों की एकजुटता जरूरी है।
डीएमके, एआईएडीएमके, पीएमके और वीसीके की ओर से उठाई गई इस मांग के बाद राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा था। हालांकि, मंत्री के बयान के बाद सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि वह विधानसभा में पारित प्रस्ताव को ही राज्य की आधिकारिक स्थिति मानती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी विवाद आने वाले समय में भी तमिलनाडु की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। चुनावी और राजनीतिक परिस्थितियों में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग दल अपने-अपने तरीके से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करते रहे हैं।
फिलहाल राज्य सरकार का कहना है कि वह तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पहले से तय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि इस विषय पर लगातार राजनीतिक संवाद बनाए रखना जरूरी है।
कावेरी जल विवाद को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल सर्वदलीय बैठक की मांग पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं।