चेन्नई। भारत की रक्षा क्षमताओं को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब, आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन ने हैदराबाद स्थित डिफेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी मेधास्त्र टेकसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित करना और उसे वास्तविक रक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों संस्थान रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से काम करेंगे।यह समझौता आईआईटी मद्रास परिसर में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी और आईआईटीएम प्रवर्तक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एम. जे. शंकर रमन की मौजूदगी में किया गया। इस अवसर पर मेधास्त्र टेकसिस्टम्स के रक्षा मामलों के मुख्य सलाहकार और सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल आर. गुरुहरी भी मौजूद रहे।समझौते के तहत दोनों संगठन अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान और विकास करेंगे। इसका प्रमुख उद्देश्य ऐसी भारतीय तकनीकों को विकसित करना है, जिनका उपयोग भविष्य में सेना की परिचालन जरूरतों के अनुरूप किया जा सके।
रक्षा क्षेत्र में AI तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
आईआईटीएम प्रवर्तक और मेधास्त्र टेकसिस्टम्स की साझेदारी मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा समाधानों पर केंद्रित रहेगी।दोनों संगठन सॉवरेन एआई यानी स्वदेशी नियंत्रण वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणाली, कॉग्निटिव इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, मल्टी-सेंसर डेटा फ्यूजन, समुद्र के भीतर निगरानी तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों पर काम करेंगे।इन तकनीकों का उद्देश्य रक्षा से जुड़े विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी का बेहतर विश्लेषण करना और सैन्य परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाना है।समझौते के जरिए अनुसंधान और वास्तविक उपयोग के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जाएगा।
स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने पर जोर
भारत में रक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीकों के स्वदेशी विकास को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।इस साझेदारी के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में अनुसंधान को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।आईआईटीएम प्रवर्तक अत्याधुनिक अनुसंधान, सेंसर और नियंत्रण प्रणालियों से संबंधित तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। वहीं मेधास्त्र टेकसिस्टम्स रक्षा क्षेत्र में एआई आधारित प्रणालियां विकसित करने के अपने अनुभव का उपयोग करेगा।दोनों संस्थानों का उद्देश्य ऐसे समाधान तैयार करना है, जिन्हें केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग के योग्य बनाया जा सके।
आईआईटी मद्रास के इनोवेशन सिस्टम से जुड़ेगी कंपनी
समझौते के बाद मेधास्त्र टेकसिस्टम्स को आईआईटी मद्रास के अनुसंधान और नवाचार तंत्र से जुड़ने का अवसर मिलेगा।इसमें संस्थान की प्रयोगशालाओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने की संभावनाएं शामिल हैं।आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब है।यह संस्थान सेंसर, नेटवर्किंग, एक्चुएटर्स और नियंत्रण प्रणालियों के क्षेत्र में अनुसंधान तथा तकनीकी विकास पर काम करता है।
डॉ. शंकर रमन ने बताया महत्वपूर्ण कदम
आईआईटीएम प्रवर्तक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एम. जे. शंकर रमन ने कहा कि संगठन भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाने वाली स्वदेशी तकनीकों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारतीय एआई क्षमताओं के विकास को महत्वपूर्ण बताते हुए मेधास्त्र के साथ इस साझेदारी का स्वागत किया।वहीं मेधास्त्र टेकसिस्टम्स के संस्थापक और सीईओ अभिनव वर्मा कलिडिंडी ने आईआईटी मद्रास के नवाचार तंत्र का हिस्सा बनने को कंपनी के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।साझेदारी से दोनों संगठनों को अपनी विशेषज्ञता साझा करने और रक्षा संबंधी तकनीकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती
भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी अनुसंधान और उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।आईआईटी मद्रास और मेधास्त्र टेकसिस्टम्स के बीच हुआ यह समझौता इसी दिशा में एक पहल है।विशेषज्ञ अनुसंधान, अत्याधुनिक तकनीक और उद्योग के अनुभव को एक साथ लाकर रक्षा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप नए समाधान विकसित किए जाएंगे।इस सहयोग का प्रमुख लक्ष्य भारतीय सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी, सुरक्षित और उपयोग के लिए तैयार एआई प्रणालियों का विकास करना है।हालांकि, समझौते के तहत विकसित होने वाली तकनीकों की तैनाती की तारीख या परियोजनाओं के बजट की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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