NEET विवाद फिर गरमाया, DMK ने बोर्ड मार्क्स से मेडिकल एडमिशन की मांग की

Update: 2026-07-24 09:55 GMT

चेन्नई : तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके (DMK) ने शुक्रवार को एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से इसमें बदलाव की मांग की। पार्टी प्रवक्ता टी.के.एस. इलांगोवन ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पूरी तरह 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणामों के आधार पर होना चाहिए।

इलांगोवन ने आरोप लगाया कि NEET परीक्षा ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है और इससे उन छात्रों को नुकसान हो रहा है, जो नियमित रूप से स्कूलों में पढ़ाई करते हैं और अच्छे अंक हासिल करते हैं।

NEET व्यवस्था पर उठाए सवाल

DMK प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ऐसे छात्र पीछे रह जाते हैं, जो पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय महंगी कोचिंग पर निर्भर हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों से आते हैं और निजी कोचिंग संस्थानों में बड़ी रकम खर्च कर सकते हैं, उन्हें परीक्षा की तैयारी में अतिरिक्त लाभ मिलता है। वहीं, सीमित संसाधनों वाले छात्रों के लिए समान अवसर हासिल करना मुश्किल हो जाता है।

इलांगोवन ने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश का आधार छात्रों की लंबे समय की शैक्षणिक मेहनत होनी चाहिए, न कि केवल एक प्रवेश परीक्षा का परिणाम।

12वीं के अंकों को आधार बनाने की मांग

DMK नेता ने मांग की कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया को राज्य बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षाओं के अंकों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इससे स्कूल शिक्षा को महत्व मिलेगा और छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव कम होगा।

उन्होंने तर्क दिया कि छात्र कई वर्षों तक स्कूल में मेहनत करते हैं और उनकी क्षमता का आकलन केवल एक परीक्षा से नहीं किया जाना चाहिए।

तमिलनाडु में लंबे समय से विरोध

NEET को लेकर तमिलनाडु सरकार और DMK लंबे समय से विरोध करती रही है। राज्य सरकार का कहना है कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए चुनौती पैदा करती है।

DMK नेताओं का दावा है कि NEET के कारण राज्य बोर्ड से पढ़ने वाले छात्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ता है। पार्टी लगातार मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में राज्य की भूमिका बढ़ाने की मांग करती रही है।

कावेरी जल विवाद पर भी बोले इलांगोवन

NEET के मुद्दे के अलावा टी.के.एस. इलांगोवन ने कावेरी जल विवाद को लेकर भी कर्नाटक के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नदी जल बंटवारे से जुड़े मामलों में राज्यों को आपसी सहयोग और स्थापित नियमों का पालन करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक का रुख तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है। इलांगोवन ने कहा कि कावेरी जल से जुड़े मुद्दे का समाधान बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

शिक्षा और समान अवसर पर जोर

DMK प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें सभी छात्रों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति किसी छात्र की सफलता में बाधा नहीं बननी चाहिए।

उन्होंने NEET व्यवस्था को लेकर पार्टी के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे सरकारी स्कूलों और सामान्य परिवारों से आने वाले छात्रों को भी मेडिकल शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

केंद्र सरकार से बदलाव की मांग

DMK ने केंद्र सरकार से NEET व्यवस्था की समीक्षा करने और राज्यों की चिंताओं पर विचार करने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हालांकि, NEET समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रीय स्तर की एक समान परीक्षा से मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है और छात्रों को समान मानदंड पर अवसर मिलता है।

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