विशाखापत्तनम: जाने-माने पर्यावरणविद् और 'भारत के वाटरमैन' राजेंद्र सिंह ने विशाखापत्तनम में डेटा सेंटर परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल संसाधनों की कमी और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर चिंता जताई है।

'जल बिरादरी' के राष्ट्रीय संयोजक और पर्यावरण कार्यकर्ता बोलिसेट्टी सत्यनारायण के साथ, उन्होंने शहर के दौरे के दौरान सिम्हाचलम स्थित श्री वराह लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी देवस्थानम का दौरा किया। बाद में, मीडिया से बात करते हुए उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह मंदिर की पवित्र भूमि, आसपास की पहाड़ियों और शहर के जल संसाधनों की रक्षा करे।

मुडासरलोवा जलाशय को बचाने के अपने पुराने प्रयासों को याद करते हुए, राजेंद्र सिंह ने इसके जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) में हो रहे निर्माण कार्यों पर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि पहाड़ियों को काटने, वनस्पतियों को हटाने और मिट्टी के कटाव से जलाशय में गाद (सिल्ट) जमा हो सकती है, जिससे इसकी भंडारण क्षमता कम हो जाएगी और विशाखापत्तनम की दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर असर पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा, "मुडासरलोवा या गंभीरम गेड्डा जलाशयों के पानी की एक बूंद भी डेटा सेंटरों के लिए इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसकी भारी कीमत लोगों, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी।" राजेंद्र सिंह ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे पर्यावरण कानूनों और अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

उन्होंने निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि यह पता चल सके कि तय किए गए पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन हो रहा है या नहीं, और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने सरकार और नागरिकों से अपील की कि वे मुडासरलोवा और गंभीरम गेड्डा जलाशयों को बचाने, सिम्हाचलम की पवित्र भूमि की रक्षा करने और शहर की पहाड़ियों व हरियाली को संरक्षित करने के लिए मिलकर काम करें।

राजेंद्र सिंह और बोलिसेट्टी सत्यनारायण ने विशाखापत्तनम सर्कल के मुख्य वन संरक्षक (चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स) आई. काशी विश्वनाथ राजू से मुलाकात की। उन्होंने पहाड़ियों, हरियाली, जलग्रहण क्षेत्रों और जल संसाधनों पर निर्माण कार्यों के प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं उनके सामने रखीं। उन्होंने वन अधिकारियों से आग्रह किया कि वे स्थिति की जांच करें और पर्यावरण की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएं। बोलिसेट्टी सत्यनारायण, उप मुख्यमंत्री तथा पर्यावरण एवं वन मंत्री के. पवन कल्याण को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें वे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने और विशाखापत्तनम के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

Tags: