हैदराबाद : 28 अक्टूबर 2026। तेलंगाना में जल संरक्षण और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बुधवार को महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। हैदराबाद के एमसीआर मानव संसाधन विकास संस्थान (MCRHRD) स्थित बोधि पवेलियन में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के संचालन, अपशिष्ट जल के शोधन और उपचारित पानी के प्रभावी उपयोग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में पानी की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने गैर-पेयजल कार्यों में उपचारित पानी का उपयोग बढ़ाने और नई व्यवस्था को 1 नवंबर 2026 से लागू करने के निर्देश दिए।
1 नवंबर से उपचारित पानी का उपयोग बढ़ाने का निर्देश
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि हैदराबाद सहित शहरी क्षेत्रों में पानी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक पार्कों, सड़क सफाई और निर्माण कार्यों में जहां संभव हो, वहां शुद्ध किए गए अपशिष्ट जल का उपयोग किया जाए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पीने योग्य पानी को ऐसे कार्यों में खर्च नहीं किया जाना चाहिए, जिनके लिए उपचारित पानी का सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।इसके तहत राज्य सचिवालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, सरकारी परिसरों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में हरियाली के रखरखाव के लिए ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों से इन निर्देशों को 1 नवंबर से प्रभावी तरीके से लागू करने को कहा गया है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में एआई तकनीक का होगा इस्तेमाल
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल शोधन प्रक्रिया की निगरानी और संचालन की दक्षता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए, जो प्लांट के संचालन और उपचारित पानी की गुणवत्ता पर निगरानी रखे।इसके अलावा सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इससे प्लांट के संचालन और पानी की आपूर्ति की लगातार निगरानी की जा सकेगी।हैदराबाद डिजास्टर रिस्पांस एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (HYDRAA) को भी इन संयंत्रों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
सड़क सफाई से लेकर निर्माण कार्यों तक इस्तेमाल होगा ट्रीटेड वाटर
मुख्यमंत्री ने आउटर रिंग रोड के आसपास हरियाली बनाए रखने, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक पार्कों के रखरखाव में उपचारित पानी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।इसके अलावा मेट्रो रेल, रेलवे परिसरों और डेटा सेंटर जैसे प्रतिष्ठानों में भी गैर-पेयजल जरूरतों के लिए ट्रीटेड वाटर की आपूर्ति बढ़ाने की योजना बनाई गई है।रेवंत रेड्डी ने भवन निर्माण गतिविधियों में उपचारित पानी के इस्तेमाल से संबंधित नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से भवन निर्माण की अनुमति देने की प्रक्रिया में भी ट्रीटेड वाटर के उपयोग से जुड़ी शर्तों को शामिल करने को कहा।सरकार का उद्देश्य निर्माण और साफ-सफाई जैसी गतिविधियों में पीने योग्य पानी के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करना है।
26 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हो रही पानी की आपूर्ति
बैठक के दौरान हैदराबाद जल बोर्ड के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में 26 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध किए गए पानी की आपूर्ति की जा रही है।इस पानी को विशेष हरे रंग के टैंकरों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, उपचारित पानी मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि उपभोक्ताओं से केवल परिवहन शुल्क लिया जाता है।मुख्यमंत्री ने पानी की आपूर्ति करने वाले टैंकरों के लिए ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए, ताकि उनके आवागमन और वितरण की निगरानी की जा सके।इसके साथ ही उपचारित पानी की उपलब्धता और आपूर्ति से संबंधित जानकारी देने के लिए एक विशेष टोल-फ्री नंबर शुरू करने को कहा गया है। लोगों को इस पानी के उपयोग के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जाएगा।
पानी की कमी से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने को कहा
तेलंगाना में बारिश की कमी और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए सरकार जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रही है।मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हैदराबाद में किसी भी परिस्थिति में पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए।उन्होंने जलाशयों में उपलब्ध पानी की लगातार निगरानी करने और भविष्य की मांग के अनुसार योजनाएं तैयार करने को कहा।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि पेयजल आपूर्ति और जल प्रबंधन में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने मौजूदा जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग और वैकल्पिक स्रोतों को विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सौर ऊर्जा और निजी निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन में बिजली की खपत कम करने के उपायों पर भी चर्चा की।उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन संयंत्रों को संचालित करने के लिए सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए।इसके अलावा निजी क्षेत्र की भागीदारी से नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया।मुख्यमंत्री का कहना था कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से अपशिष्ट जल को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।
बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू, मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव माणिक राज, साइबराबाद नगर निगम आयुक्त सृजना, मलकाजगिरी नगर निगम आयुक्त विनय कृष्णा रेड्डी और जल बोर्ड के प्रबंध निदेशक अशोक रेड्डी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।इसके अतिरिक्त बिजली वितरण कंपनियों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और निर्धारित समय पर आवश्यक व्यवस्थाएं लागू करने के निर्देश दिए।
जल संरक्षण को लेकर सरकार की नई रणनीति
तेलंगाना सरकार का यह कदम शहरी जल प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक जरूरतों के कारण हैदराबाद में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है।ऐसी स्थिति में उपचारित अपशिष्ट जल का दोबारा उपयोग ताजे पानी पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है।मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।अब 1 नवंबर से लागू होने वाली नई व्यवस्था के तहत सरकारी संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य गैर-पेयजल गतिविधियों में उपचारित पानी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक अधिक टिकाऊ जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है।
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