हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में दशहरा उत्सव के दौरान राजनीतिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का रावण के रूप में पुतला जलाने की तैयारी कर रहे भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकर्ताओं और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान तेलंगाना राज्य मत्स्य निगम के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मेट्टू साई कुमार तथा उनके समर्थकों पर BRS कार्यकर्ताओं पर लकड़ी के डंडों से हमला करने का आरोप लगा है। घटना के बाद मंगलवार को साई कुमार के एक कथित धमकी भरे बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया।साई कुमार ने कथित तौर पर कहा कि BRS कार्यकर्ताओं पर इस बार केवल हमला हुआ है, लेकिन अगली बार उन्हें दफना दिया जाएगा। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस कथन के स्वतंत्र सत्यापन की पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का पुतला जलाने की थी तैयारी
यह विवाद हैदराबाद के पुराने शहर क्षेत्र में स्थित सीतारामबाग मैदान में हुआ। यहां BRS से जुड़े कार्यकर्ता दशहरा के अवसर पर एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन आयोजित करने पहुंचे थे।प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को रावण के रूप में दर्शाने वाला पुतला तैयार किया था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव को भगवान राम के रूप में प्रदर्शित किया गया था, जो रेवंत रेड्डी की ओर तीर साध रहे थे।इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए BRS कार्यकर्ता कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे। लेकिन पुतला दहन से पहले ही दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।
कांग्रेस नेता और समर्थकों पर हमले का आरोप
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पुतला दहन की जानकारी मिलने के बाद मत्स्य निगम के अध्यक्ष मेट्टू साई कुमार अपने समर्थकों के साथ सीतारामबाग मैदान पहुंचे।आरोप है कि उन्होंने BRS से जुड़े छात्र कार्यकर्ताओं को पुतला जलाने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर डंडों से हमला किया गया।घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया। घटना में पुलिस के हस्तक्षेप के दौरान भी विवाद और कथित अभद्र व्यवहार की जानकारी सामने आई है।
अगली बार दफना देंगे', बयान से बढ़ा विवाद
मंगलवार को कांग्रेस नेता मेट्टू साई कुमार के कथित बयान ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया।उन्होंने कथित तौर पर BRS कार्यकर्ताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि इस बार उनके साथ केवल मारपीट हुई है, लेकिन अगली बार उन्हें दफना दिया जाएगा।इस तरह की धमकी ने राजनीतिक विरोध के दौरान हिंसा और नेताओं की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति के खिलाफ हिंसा या जान से मारने की धमकी को गंभीर मामला माना जाता है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू
सीतारामबाग में हुई झड़प की सूचना मिलने पर पुलिस ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया।स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने घटना के संबंध में मामले दर्ज किए हैं और जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो भी घटनाक्रम की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं।पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि झड़प की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका रही।आरोपों की पुष्टि और संबंधित लोगों की जवाबदेही जांच के निष्कर्षों के आधार पर निर्धारित होगी।
कांग्रेस और BRS के बीच बढ़ा राजनीतिक तनाव
तेलंगाना में कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बीच राजनीतिक मतभेद भी सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे हैं।दशहरा के अवसर पर मुख्यमंत्री का रावण के रूप में पुतला तैयार करना इसी राजनीतिक विरोध का प्रतीक था। हालांकि, इस प्रदर्शन को लेकर हुई झड़प ने विरोध जताने के तरीकों और सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे को सामने ला दिया है।
दशहरा उत्सव के दौरान हिंसा से उठे सवाल
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर राजनीतिक विरोध के कारण हुई हिंसा ने आयोजन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती को उजागर किया है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। कांग्रेस नेता और उनके समर्थकों पर लगाए गए हमले के आरोपों के साथ कथित धमकी भरे बयान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।इस घटना ने तेलंगाना में राजनीतिक विरोध, कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है।
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