हैदराबाद। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन की महारैली को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इस कार्यक्रम को 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली के बारे में गलत जानकारी फैलाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। भाजपा नेता ने दावा किया कि कांग्रेस को अपनी प्रस्तावित रैली में पर्याप्त जनसमर्थन जुटाने का भरोसा नहीं है, इसलिए वह लोगों को दिल्ली जाने से रोके जाने की कहानी गढ़ रही है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर भी निशाना साधा। दूसरी ओर कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं तथा मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक नवंबर को दिल्ली में व्यापक विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

रामचंद्र राव ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन वास्तविक जनसमस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के मन में अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं की ओर से ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, मानो लोगों को दिल्ली में आयोजित रैली में पहुंचने से रोका जा रहा हो। उन्होंने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को रैली में शामिल होने से नहीं रोका जा रहा है।

उनका कहना था कि लोग जहां जाना चाहते हैं, जा सकते हैं और इसमें किसी तरह की बाधा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिना पर्याप्त आधार के ऐसी बातें प्रचारित कर रही है, जिनसे जनता के बीच भ्रम पैदा हो सकता है। हालांकि लोगों को रोकने संबंधी आरोपों और उनके खंडन की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

एन. रामचंद्र राव ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों की जांच और अद्यतन करने का कार्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया उचित तरीके से संचालित की गई है और कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक राजनीतिक विवाद में बदल रही है।

उन्होंने कर्नाटक के एक कांग्रेस मंत्री के कथित बयान का भी उल्लेख किया। भाजपा नेता के अनुसार, संबंधित मंत्री ने स्वीकार किया था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम गलत तरीके से नहीं हटाए गए। हालांकि राव ने अपने इस बयान में संबंधित मंत्री का नाम और उसके कथन का विस्तृत संदर्भ स्पष्ट नहीं किया। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जा रहा है, तो कांग्रेस निर्वाचन आयोग को लगातार निशाना क्यों बना रही है। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जनता की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है।

रामचंद्र राव ने कहा कि रामलीला मैदान में प्रस्तावित कार्यक्रम को जनता का व्यापक समर्थन नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए निर्वाचन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं की छवि प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि ये भाजपा नेता के राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष।

उन्होंने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं की भी आलोचना की। राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विवादों को राजनीतिक आंदोलन का रूप देकर सरकार तथा संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ माहौल तैयार कर रहा है।

दूसरी ओर कांग्रेस और INDIA गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष निर्वाचन आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहा है।

कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान के तहत महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है।

विपक्षी गठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और उनके इस्तीफे की मांग की है। हालांकि निर्वाचन आयोग से संबंधित आरोपों का मूल्यांकन आधिकारिक रिकॉर्ड, कानूनी प्रक्रिया और स्वतंत्र साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

दिल्ली पुलिस ने एक नवंबर की रैली के आयोजन के लिए निर्धारित शर्तों के साथ अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया है। प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, निगरानी और कार्यक्रम के समय से संबंधित शर्तें निर्धारित की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रैली के लिए सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक का समय तय किया गया है।

इस बीच कांग्रेस ने तेलंगाना से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने की तैयारी की है। सिद्धिपेट जिले के हुस्नाबाद क्षेत्र से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक समूह बसों के माध्यम से दिल्ली के लिए रवाना हुआ है। ये कार्यकर्ता प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भी रैली में भाग लेने की योजना को लेकर भाजपा ने पहले ही सवाल उठाए थे। रामचंद्र राव ने 25 अक्टूबर को आरोप लगाया था कि प्रदेश में वर्षा की कमी और जल संकट जैसी समस्याओं के बीच मुख्यमंत्री दिल्ली में राजनीतिक कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त हैं।

उन्होंने दावा किया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों को पानी की कमी और खेती से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में सरकार को इन समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि प्रदेश में सूखे की वास्तविक स्थिति और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन सरकारी आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।

भाजपा ने कांग्रेस के एसआईआर विरोधी अभियान के जवाब में तेलंगाना में पदयात्राएं और जनसभाएं आयोजित करने की योजना भी बनाई है। पार्टी ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' के नारे के साथ अपना राजनीतिक अभियान चलाने की घोषणा की है।

इस अभियान के अंतर्गत दो नवंबर को हैदराबाद में एक बड़ी पदयात्रा आयोजित करने की योजना है। भाजपा नेताओं के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। पार्टी का उद्देश्य एसआईआर के समर्थन में अपना पक्ष रखना और कांग्रेस के आरोपों का जवाब देना है।

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत निर्वाचन आयोग मतदाताओं की पात्रता और रिकॉर्ड की जांच करके सूचियों को अद्यतन करता है। इसका घोषित उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना और अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान करना होता है।

हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति में उसे दावे और आपत्तियों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार कराने का अवसर मिलना जरूरी है। यही कारण है कि एसआईआर को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया, मतदाताओं की सुविधा और राजनीतिक दलों की शिकायतें सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

फिलहाल एक नवंबर की रैली से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं, वहीं भाजपा इन आरोपों को निराधार बताते हुए निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का बचाव कर रही है।

अब सभी की नजरें दिल्ली में प्रस्तावित विपक्ष की महारैली और उसके अगले दिन तेलंगाना में भाजपा की पदयात्रा पर रहेंगी। दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से राजनीतिक दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर अपना-अपना पक्ष जनता के सामने रखेंगे। इस विवाद में अंतिम रूप से महत्वपूर्ण बात यह होगी कि पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

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