हैदराबाद: तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने दिल्ली के एक होटल में स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा और जुक्कल के विधायक थोटा लक्ष्मिकांत राव के बीच हुए विवाद पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है और इसे कांग्रेस आलाकमान को भेज दिया है।
इस रिपोर्ट में विवाद के साथ-साथ इस बात का भी जिक्र है कि दोनों नेताओं को अपनी बात रखने के लिए गुरुवार को गांधी भवन में बुलाई गई बैठक में वे शामिल नहीं हुए।
TPCC प्रमुख ने इस विवाद के पीछे के तथ्यों का पता लगाने के लिए मंत्री और विधायक के साथ अलग-अलग बैठकें करने की योजना बनाई थी। हालांकि, दामोदर राजा नरसिम्हा, जिन्होंने पहले बैठक में आने की सहमति दी थी, ने आखिरी समय पर पार्टी को सूचित किया कि वे नहीं आएंगे। इसके चलते विधायक के साथ होने वाली बैठक भी रद्द कर दी गई।
महेश कुमार गौड़ ने उनके न आने और पार्टी के बुलावे पर कोई जवाब न देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं, कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य दामोदर राजा नरसिम्हा ने संकेत दिया है कि वे राज्य प्रमुख के सामने पेश होने के बजाय सीधे पार्टी आलाकमान से बात करेंगे।
बताया जा रहा है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक ने मंत्री के गृह जिले के राजनीतिक मामलों में दखल दिया। आरोप है कि उन्होंने संगारेड्डी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के लिए एक गुट विशेष के उम्मीदवार का समर्थन किया था।
विधायक के करीबी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में रामलीला मैदान में हुई 'चलो दिल्ली' रैली के दौरान, जब थोटा लक्ष्मिकांत राव दिल्ली के एक होटल में मंत्री के पास गए, तो मंत्री ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें धमकी दी। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा छेड़ दी है।
दिल्ली होटल की यह घटना पार्टी के भीतर चल रहे विवादों में से केवल एक है। महेश कुमार गौड़ ने आलाकमान को जडचेरला के विधायक जनमपल्ली अनिरुद्ध रेड्डी की टिप्पणियों के बारे में भी एक रिपोर्ट भेजी है। इसके अलावा, उन्होंने मुनुगोडे के विधायक कोमाटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी से जुड़े मुद्दों और पेड्डापल्ली में हुए घटनाक्रमों के बारे में भी पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया है।
TPCC प्रमुख तेलंगाना में चल रहे विभिन्न गुटीय विवादों और संगठनात्मक मुद्दों पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए वे सभी पक्षों के नेताओं से बातचीत करेंगे, ताकि सार्वजनिक रूप से हो रहे इन विवादों से पार्टी के अनुशासन और एकता पर पड़ने वाले असर को लेकर बढ़ती चिंताओं को दूर किया जा सके।