तेलंगाना: सरकार ने "भूमि-विवाद मुक्त तेलंगाना" बनाने के लिए तीन चरणों में एक व्यापक भूमि पुनर्सर्वेक्षण (री-सर्वे) शुरू किया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के विजन के तहत किए जा रहे इस काम का उद्देश्य हर ज़मीन के टुकड़े के लिए स्पष्ट स्वामित्व अधिकार और सटीक सीमाएं तय करना है।
पहले चरण में हैदराबाद को छोड़कर 32 जिलों के 2,720 गांव शामिल हैं। सरकार ने इस चरण को नवंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
अब तक 285 राजस्व गांवों में पुनर्सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने इन गांवों में ज़मीन मालिकों को नोटिस जारी कर उनसे आपत्तियां (अगर कोई हों) दर्ज करने को कहा है। सरकार ने इस काम के लिए पहले ही 411 'रोवर्स' (सर्वेक्षण उपकरण) हासिल कर लिए हैं। सटीक और तकनीक-आधारित सर्वेक्षण में तेज़ी लाने के लिए 400 और आधुनिक रोवर्स के टेंडर भी फाइनल कर दिए गए हैं।
इस सर्वेक्षण में पुरानी मापन विधियों की जगह आधुनिक DGPS, GIS और QGIS तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये उपकरण सर्वेक्षण रिकॉर्ड को डिजिटल बनाएंगे और भविष्य में सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों को रोकने में मदद करेंगे। ज़मीन के हर टुकड़े को एक यूनीक 'भूधार नंबर' और 'भूधार कार्ड' दिया जाएगा, जिससे स्वामित्व रिकॉर्ड में अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता आएगी।
पलेर निर्वाचन क्षेत्र में जल्द ही भूधार कार्ड बांटे जाएंगे। यह कदम नेलाकोंडापल्ली मंडल के कोंकारा गांव में 665 एकड़ ज़मीन के 100% पुनर्सर्वेक्षण के बाद उठाया गया है।
राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ज़मीन मालिकों को पहले से नोटिस दें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी ज़मीनों और गांव की सीमाओं का सही तरीके से सीमांकन (demarcation) सुनिश्चित किया जाए और आपत्तियों का समाधान पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए।
यह मिशन ज़मीन के रिकॉर्ड से जुड़ी दशकों पुरानी समस्याओं को हल करेगा, जिनमें से कई पुरानी और आउटडेटेड सर्वेक्षण रिपोर्टों के कारण पैदा हुई थीं। इससे ज़मीन की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन (नामांतरण) से जुड़ी जटिलताओं के भी कम होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि यह पहल विज्ञान, तकनीक और पारदर्शी प्रशासन के ज़रिए किसानों के हितों की रक्षा करने और संपत्ति के अधिकारों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक कदम है।
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