अगरतला। त्रिपुरा में त्योहारी सीजन के दौरान राशन दुकानों से सूजी, मैदा और चीनी मुफ्त बांटने की राज्य सरकार की योजना को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। राज्य के खाद्य मंत्री सुशांत चौधरी ने रविवार को विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनता को गलत जानकारी देकर भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPI(M) के नेताओं पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता बिना तथ्यों की पुष्टि किए सरकार के खिलाफ बयान दे रहे हैं।मीडिया से बातचीत के दौरान खाद्य मंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों को सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने राशन दुकानों में खाद्य सामग्री की उपलब्धता को लेकर गलत दावे किए और उनके नाम का इस्तेमाल करके जनता को गुमराह करने का प्रयास किया।
राशन दुकानों में सामग्री नहीं मिलने के आरोपों पर जवाब
सुशांत चौधरी ने कहा कि विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि राज्य की राशन दुकानों में सूजी, मैदा और चीनी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक हस्तियां इस मुद्दे को लेकर गलत जानकारी फैला रही हैं।मंत्री के अनुसार, लगभग 10 से 15 लोगों ने सार्वजनिक रूप से ऐसे दावे किए, जिससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।चौधरी ने कहा कि त्योहारी सीजन में मुफ्त खाद्य सामग्री वितरण जैसे विषय पर बयान देने से पहले संबंधित तथ्यों की जांच करना जरूरी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की अपील की।
मंत्री से फोन पर बातचीत का दावा भी खारिज
खाद्य मंत्री ने विपक्षी नेताओं के उन दावों पर भी सवाल उठाए, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने राशन सामग्री की उपलब्धता के संबंध में मंत्री से बातचीत की थी।सुशांत चौधरी ने बताया कि कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने उनसे फोन पर संपर्क किया, लेकिन मंत्री कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।चौधरी ने कहा कि वास्तविकता में किसी ने उनसे फोन पर बातचीत नहीं की थी। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने संबंधित व्यक्ति से पूछा कि क्या वास्तव में उनकी बातचीत हुई थी, तो वह कोई जवाब नहीं दे पाया।मंत्री ने इसे गलत जानकारी फैलाने का उदाहरण बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ऐसे दावों से बचना चाहिए।
CPI(M) नेताओं पर लगाया पाखंड का आरोप
सुशांत चौधरी ने CPI(M) के कुछ नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि उनके बयानों में विरोधाभास दिखाई देता हैमंत्री के अनुसार, कुछ नेताओं ने दावा किया कि उनकी खाद्य मंत्री से बातचीत हुई थी, जबकि अन्य ने कहा कि उन्होंने मंत्री को फोन किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठाया गया।उन्होंने सवाल उठाया कि जब अलग-अलग लोग एक ही विषय पर विरोधाभासी बातें कर रहे हैं, तो जनता को किस दावे पर विश्वास करना चाहिए।चौधरी ने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी व्यक्ति का नाम लेकर गलत जानकारी फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने इस तरह की बयानबाजी को पाखंड बताते हुए विपक्षी नेताओं से तथ्यात्मक आलोचना करने को कहा।
राजनीतिक आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए
मीडिया से बातचीत में खाद्य मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना सामान्य बात है। सरकार के फैसलों और योजनाओं पर विपक्ष सवाल उठा सकता है, लेकिन आरोपों का आधार सही जानकारी होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर गलत सूचना फैलाने से अनावश्यक भ्रम पैदा होता है। विशेष रूप से राशन जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री से संबंधित मामलों में जिम्मेदारी के साथ बयान देना जरूरी है।मंत्री ने कहा कि किसी राजनीतिक दल को दूसरे दल की आलोचना करने से नहीं रोका जा सकता, लेकिन व्यक्तिगत नाम लेकर तथ्यहीन दावे करना स्वीकार्य नहीं है।
मुफ्त खाद्य सामग्री वितरण पर जारी विवाद
राज्य सरकार की ओर से त्योहारी सीजन में सूजी, मैदा और चीनी मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं के आरोपों के बाद खाद्य मंत्री ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में राशन दुकानों पर सामग्री के वास्तविक स्टॉक, वितरण की स्थिति और लाभार्थियों की संख्या का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए खाद्य सामग्री की उपलब्धता को लेकर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।फिलहाल, मंत्री के बयान के बाद त्रिपुरा में मुफ्त राशन सामग्री वितरण का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। सुशांत चौधरी ने विपक्षी नेताओं से कहा है कि वे सरकार की आलोचना करें, लेकिन जनता के सामने सही और प्रमाणित जानकारी ही रखें।
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