गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में खून की अवैध खरीद-बिक्री करने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। रामगढ़ताल थाना पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार रात भगत चौराहे के पास एक कार से 100 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (पीआरबीसी) बरामद की हैं। इस मामले में पुलिस ने मुरादाबाद निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बरामद रक्त को मुरादाबाद से गोरखपुर के एक ब्लड बैंक तक पहुंचाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी कम कीमत पर रक्त प्राप्त कर उसे दूसरे ब्लड बैंकों में अधिक कीमत पर बेचने का काम करते थे। इस घटना के सामने आने के बाद रक्त की अवैध आपूर्ति और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
भगत चौराहे के पास पुलिस ने रोकी संदिग्ध कार
जानकारी के अनुसार, गोरखपुर पुलिस को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि दूसरे राज्यों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से वाहनों के जरिए रक्त की खेप लाई जा रही है। इन खेपों को अलग-अलग स्थानों पर अधिक कीमत पर बेचे जाने की आशंका जताई गई थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ के निर्देश पर रामगढ़ताल पुलिस ने जांच शुरू की। मंगलवार को मुखबिर से जानकारी मिली कि मुरादाबाद से रक्त की एक बड़ी खेप गोरखपुर पहुंचने वाली है।इसके बाद पुलिस ने औषधि निरीक्षक श्रीध्वजेश्वर शुक्ला को सूचना दी और संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने भगत चौराहे के पास एलआईसी कार्यालय के आसपास घेराबंदी की। इसी दौरान उत्तराखंड के पंजीकरण नंबर वाली एक सफेद ऑल्टो कार को रोककर उसकी तलाशी ली गई।तलाशी के दौरान कार में बड़ी मात्रा में रक्त के बैग मिलने से अधिकारियों के सामने इसकी आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों और परिवहन व्यवस्था की जांच का सवाल खड़ा हो गया।
कार की पिछली सीट और डिक्की से मिले 100 ब्लड बैग
संयुक्त टीम ने जब कार की तलाशी ली तो पिछली सीट पर रखे गत्ते के डिब्बे में 40 यूनिट रक्त मिला। वहीं, कार की डिक्की में रखे थर्माकोल के डिब्बे से 60 यूनिट रक्त बरामद किया गया।इस प्रकार कुल 100 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स बरामद हुईं। पुलिस ने मौके पर ही वाहन में सवार दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुरादाबाद निवासी फहीम अहमद और ताज गुड्डू के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों से रक्त की खरीद, परिवहन और बिक्री से जुड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ की गई। इसके बाद कार को भी सीज कर दिया गया।
मुरादाबाद से गोरखपुर पहुंचाई जा रही थी खून की खेप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बरामद रक्त मुरादाबाद के एसएस चैरिटेबल ब्लड बैंक से लाया गया था। इसकी आपूर्ति गोरखपुर स्थित आरोग्य ब्लड बैंक में की जानी थी।पुलिस का कहना है कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कम कीमत पर रक्त लेकर मांग के अनुसार विभिन्न ब्लड बैंकों को अधिक कीमत पर बेचते थे।हालांकि, इस मामले में जिन ब्लड बैंकों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी है। केवल रक्त की आपूर्ति से किसी संस्था की अवैध गतिविधि में संलिप्तता सिद्ध नहीं होती।अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि रक्त की खरीद-बिक्री किन शर्तों पर की जा रही थी, परिवहन के लिए कौन जिम्मेदार था और क्या सभी आवश्यक नियमों का पालन हुआ था।
रक्त के दूषित होने की आशंका, जांच के लिए नमूने सुरक्षित
बरामद रक्त की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं। विशेष रूप से यह जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि परिवहन के दौरान रक्त को निर्धारित तापमान पर रखा गया था या नहीं।औषधि निरीक्षक ने बरामद दोनों डिब्बों से एक-एक यूनिट रक्त नमूने के रूप में सुरक्षित की है। इन नमूनों की जांच से रक्त की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पैक्ड रेड ब्लड सेल्स का उपयोग उन मरीजों के उपचार में किया जाता है जिन्हें लाल रक्त कोशिकाओं की आवश्यकता होती है। गंभीर एनीमिया, अत्यधिक रक्तस्राव और कुछ अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में डॉक्टर रक्त चढ़ाने की सलाह दे सकते हैं।पीआरबीसी को सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित तापमान, उचित भंडारण और नियंत्रित परिवहन व्यवस्था आवश्यक होती है। यदि इन मानकों का पालन नहीं किया जाए तो रक्त की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।फिलहाल बरामद रक्त के दूषित होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित जांच के परिणामों से स्पष्ट होगी।
दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2) तथा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की संबंधित धाराओं 18 और 27 के तहत कार्रवाई की है।पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जांच के दौरान रक्त की आपूर्ति से जुड़े अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की संभावित भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
रक्त की अवैध खरीद-बिक्री का मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसका सीधा संबंध मरीजों की जिंदगी से है। दुर्घटना, प्रसव संबंधी जटिलताओं और गंभीर बीमारियों के दौरान कई मरीजों को तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ती है।ऐसे समय में रक्त की सुरक्षित और अधिकृत उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। रक्त संग्रह, जांच, भंडारण और वितरण की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन मरीजों को संक्रमण तथा अन्य संभावित जोखिमों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रक्त केंद्र से रक्त प्राप्त करते समय उसकी अधिकृत स्थिति, रक्त के परीक्षण और निर्धारित भंडारण प्रक्रिया का ध्यान रखा जाना चाहिए।
अब पूरे नेटवर्क की जांच पर नजर
गोरखपुर में 100 यूनिट रक्त बरामद होने के बाद यह सवाल सामने आया है कि इस प्रकार की आपूर्ति कितने समय से चल रही थी और इसके माध्यम से किन-किन स्थानों तक रक्त पहुंचाया गया।पुलिस की आगे की जांच में आरोपियों के संपर्कों, रक्त की आपूर्ति के दस्तावेजों और संभावित आर्थिक लेनदेन की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।