यमुना की जैव विविधता बचाने का अभियान, आगरा में 50 हजार मछलियों का नदी में संचय
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी की जलीय जैव विविधता को समृद्ध करने और मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए बड़ी पहल की गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को दयालबाग स्थित पोइया घाट पर विशेष रिवर रैंचिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने भारतीय मेजर कार्प प्रजाति की 50 हजार मत्स्य अंगुलिकाओं को यमुना नदी में छोड़ा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाना, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और मछली पालन से जुड़े लोगों की आजीविका को बढ़ावा देना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के संकल्प और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नदियों को स्वच्छ, निर्मल और जीवंत बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है।
पोइया घाट पर आयोजित हुआ विशेष रिवर रैंचिंग कार्यक्रम
आगरा के दयालबाग क्षेत्र में स्थित पोइया घाट पर मंगलवार को मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने यमुना नदी में 50 हजार मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित कीं।
ये अंगुलिकाएं भारतीय मेजर कार्प प्रजाति की हैं, जिन्हें मीठे पानी की नदियों और तालाबों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कार्यक्रम के माध्यम से यमुना नदी में मत्स्य संपदा को बढ़ाने और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने नदी के पर्यावरण को सुरक्षित रखने की आवश्यकता बताते हुए जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
क्या है रिवर रैंचिंग और कैसे करती है काम?
रिवर रैंचिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत नदी के प्राकृतिक मत्स्य भंडार को बढ़ाने के लिए उपयुक्त प्रजातियों की छोटी मछलियों को नदी में छोड़ा जाता है।
इन छोटी मछलियों को मत्स्य अंगुलिका या फिंगरलिंग कहा जाता है।
इनका आकार सामान्यतः इतना विकसित होता है कि उचित परिस्थितियां मिलने पर वे प्राकृतिक जल स्रोत में जीवित रहकर आगे बढ़ सकें।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य नदियों में मछलियों की घटती उपलब्धता की भरपाई करने में सहायता करना है।
हालांकि, छोड़ी गई सभी मछलियों का जीवित रहना सुनिश्चित नहीं होता। उनकी वृद्धि नदी में पानी की गुणवत्ता, भोजन, तापमान और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
भारतीय मेजर कार्प प्रजाति की मछलियों को मिला नया ठिकाना
पोइया घाट पर भारतीय मेजर कार्प समूह की 50 हजार मत्स्य अंगुलिकाएं छोड़ी गई हैं।
इस समूह में रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रमुख मीठे पानी की मछलियां शामिल होती हैं।
ये मछलियां भारतीय नदियों और जलाशयों में मत्स्य संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
इनकी मौजूदगी जलीय खाद्य जाल और स्थानीय मत्स्य संसाधनों का हिस्सा होती है।
मत्स्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी नदी में उपयुक्त प्रजातियों का नियंत्रित संवर्धन करने से स्थानीय मत्स्य भंडार को सहारा मिल सकता है।
हालांकि, पोइया घाट पर छोड़ी गई मछलियों में किस प्रजाति की कितनी संख्या थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं है।
एसपी सिंह बघेल बोले- नदियों को जीवंत बनाए रखना जरूरी
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुरूप नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में भी जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में विभिन्न पहल संचालित की जा रही हैं।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, रिवर रैंचिंग के माध्यम से नदियों में मत्स्य संपदा बढ़ाने के साथ जलीय जैव विविधता के संरक्षण में सहायता मिल सकती है।
उन्होंने यमुना नदी को आगरा की आस्था, संस्कृति और जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर बताया।
मछुआरा समुदाय की आजीविका को मिलेगा लाभ
रिवर रैंचिंग कार्यक्रम का एक उद्देश्य मछली पकड़ने और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े समुदायों की आजीविका को मजबूत करना भी है।
नदियों में मछलियों की उपलब्धता बढ़ने से भविष्य में मत्स्य संसाधनों के सतत उपयोग के अवसर बढ़ सकते हैं।
इससे पारंपरिक मछुआरा परिवारों को आर्थिक गतिविधियों में सहायता मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, यह लाभ तुरंत नहीं मिलेगा। छोड़ी गई छोटी मछलियों को बढ़ने और प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल होने में समय लगता है।
इसके साथ ही नदी में मछलियों का अत्यधिक शिकार रोकना और प्रजनन के अनुकूल परिस्थितियां बनाए रखना भी आवश्यक है।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत देश की प्रमुख नदी प्रणालियों में देशी मत्स्य भंडार के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए रिवर रैंचिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दिया है।
यमुना की जैव विविधता के संरक्षण की जरूरत
यमुना उत्तर भारत की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है। इसके जल में विभिन्न प्रकार की मछलियां और अन्य जलीय जीव पाए जाते हैं।
हालांकि, प्रदूषण, प्राकृतिक आवास में बदलाव और जल प्रवाह से संबंधित समस्याएं नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती हैं।
केंद्र सरकार की ओर से फरवरी 2026 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, यमुना नदी में वर्ष 2017 के आधार अध्ययन में 143 मत्स्य प्रजातियां दर्ज थीं, जबकि वर्ष 2025 के अध्ययन में 84 प्रजातियां दर्ज की गईं।
इन आंकड़ों की तुलना करते समय अध्ययन के क्षेत्र और पद्धति में संभावित अंतर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
फिर भी ये आंकड़े नदी की मत्स्य विविधता की नियमित निगरानी और संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के बिना अधूरा रहेगा संरक्षण
यमुना में मत्स्य अंगुलिकाएं छोड़ना संरक्षण की दिशा में एक पहल है, लेकिन नदी की दीर्घकालिक स्थिति सुधारने के लिए प्रदूषण नियंत्रण भी आवश्यक है।
यदि पानी में पर्याप्त घुलित ऑक्सीजन नहीं होगी या प्रदूषकों की मात्रा अधिक होगी, तो मछलियों की वृद्धि और जीवित रहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
नदियों में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरे के प्रवाह को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह और जलीय आवासों का संरक्षण भी जरूरी है।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण से रिवर रैंचिंग को प्रदूषण नियंत्रण और वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन के साथ जोड़कर देखना चाहिए।
इससे मत्स्य संवर्धन के प्रयास अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी चल रहा अभियान
उत्तर प्रदेश में केवल आगरा ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों में भी नदियों में मत्स्य अंगुलिकाएं छोड़ने के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
22 अक्टूबर को शामली जिले में यमुना नदी के बिडौंली पुल के पास 50 हजार मत्स्य अंगुलिकाएं छोड़ी गई थीं।
वहीं, 27 अक्टूबर को बलिया जिले में गंगा नदी के पचरूखिया घाट पर 1.60 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का संचय किया गया।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नदी में मत्स्य संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाना और जलीय जैव विविधता के संरक्षण को प्रोत्साहित करना है।
वैज्ञानिक निगरानी से पता चलेगा अभियान का प्रभाव
रिवर रैंचिंग की सफलता का मूल्यांकन केवल नदी में छोड़ी गई मछलियों की संख्या से नहीं किया जा सकता।
इसके लिए यह देखना भी जरूरी है कि छोड़ी गई मछलियों में कितनी जीवित रहती हैं, उनकी वृद्धि कैसी होती है और वे नदी के प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप कितनी सफलतापूर्वक ढलती हैं।
नदी के जल की गुणवत्ता और स्थानीय मत्स्य प्रजातियों पर पड़ने वाले प्रभाव की निगरानी भी उपयोगी होती है।
केंद्र सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड और मत्स्य अनुसंधान संस्थानों के तकनीकी सहयोग से देश में ऐसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन और नियमित निगरानी से भविष्य में मत्स्य संरक्षण की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
यमुना संरक्षण में जनभागीदारी भी जरूरी
आगरा के पोइया घाट पर आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर यमुना नदी के संरक्षण का मुद्दा सामने रखा है।
नदी में 50 हजार मत्स्य अंगुलिकाएं छोड़े जाने से मत्स्य संसाधनों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।
लेकिन नदी को लंबे समय तक स्वच्छ और जीवंत बनाए रखने के लिए सरकारी योजनाओं के साथ आम नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है।
नदी में कचरा नहीं डालना, जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना और स्थानीय संरक्षण गतिविधियों में भाग लेना इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने भी कार्यक्रम के दौरान नदी संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।
पोइया घाट की यह पहल यमुना में मत्स्य संसाधनों के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब इसके दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन वैज्ञानिक निगरानी और नदी की जल गुणवत्ता में सुधार पर निर्भर करेगा।