अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा पर दयाशंकर सिंह का निशाना, बोले- सपा की सोच परिवारवादी
रायबरेली। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की रायबरेली से शुरू हो रही पीडीए रथ यात्रा को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने पीडीए की परिभाषा को लेकर अखिलेश यादव पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सपा प्रमुख समय-समय पर इसका अलग-अलग अर्थ बताते हैं। दयाशंकर सिंह ने इसे अखिलेश यादव का राजनीतिक “जुमला” बताते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सोच पीडीए की नहीं बल्कि “परिवारवादी” है। ये भाजपा नेता के राजनीतिक आरोप हैं।
दयाशंकर सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी आम तौर पर पीडीए का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताती है, लेकिन अलग-अलग मौकों पर इसके दायरे की दूसरी व्याख्याएं भी सामने आई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पीडीए की परिभाषा ही अलग-अलग तरीके से पेश की जा रही है तो इसे लेकर सपा का स्पष्ट राजनीतिक संदेश क्या है।
भाजपा नेता ने कहा कि कभी पीडीए को पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताया जाता है तो कभी इसमें पंडित और आधी आबादी का उल्लेख किया जाता है। उन्होंने इसी आधार पर अखिलेश यादव पर राजनीतिक निशाना साधा। हालांकि समाजवादी पार्टी लंबे समय से पीडीए को मुख्य रूप से पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के सामाजिक-राजनीतिक गठजोड़ के रूप में प्रस्तुत करती रही है और इसे सामाजिक न्याय की अपनी राजनीति से जोड़ती है।
अखिलेश यादव की रायबरेली यात्रा ऐसे समय हो रही है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। सपा प्रमुख गुरुवार को रायबरेली में पीडीए रथ के साथ कार्यक्रम कर रहे हैं। रथ पर डॉ. भीमराव आंबेडकर और विभिन्न समाज सुधारकों की तस्वीरों के साथ सामाजिक न्याय से जुड़े नारे भी लगाए गए हैं।
रायबरेली में अखिलेश यादव के कार्यक्रम की शुरुआत बछरावां क्षेत्र से निर्धारित की गई। इसके बाद उन्हें हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पहुंचना है। अखिलेश की यात्रा का संबंध हाल में रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच हुए विवाद की पृष्ठभूमि से भी जोड़ा जा रहा है। सपा नेताओं ने इस मामले में पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे, जबकि पुलिस की ओर से कुछ आरोपों से इनकार किया गया था।
राजनीतिक रूप से रायबरेली का चयन भी चर्चा में है। यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है। इसके साथ ही जिले की विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी की मौजूदगी भी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने जिले में चार सीटें जीती थीं, हालांकि बाद में ऊंचाहार से निर्वाचित मनोज पांडेय भाजपा में शामिल हो गए। वर्तमान में जिले में सपा के तीन विधायक हैं।
सपा के लिए पीडीए पिछले कुछ वर्षों में एक प्रमुख राजनीतिक नारा बनकर उभरा है। पार्टी इसके माध्यम से पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच अपना सामाजिक आधार मजबूत करने का प्रयास कर रही है। रायबरेली से रथ यात्रा को लेकर भी पार्टी सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को सामने रख रही है।
दूसरी तरफ भाजपा नेताओं ने पीडीए की अवधारणा और सपा की राजनीति को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। दयाशंकर सिंह का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सामाजिक समूहों के नाम पर राजनीति करती है, लेकिन वास्तविक रूप से उसकी प्राथमिकता परिवार केंद्रित राजनीति है। यह भाजपा नेता का आरोप है और समाजवादी पार्टी इससे असहमति जताती रही है।
दयाशंकर सिंह ने अखिलेश यादव की रथ यात्रा पर भी तंज किया। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष को उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों का अंदाजा है और इसी वजह से इस तरह की यात्राएं निकाली जा रही हैं। उनके बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के बीच बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
रायबरेली में पीडीए रथ यात्रा को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। शहर में अखिलेश यादव के स्वागत में विभिन्न पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं। दूसरी तरफ उनके विरोध में भी पोस्टर सामने आए हैं। इससे रथ यात्रा शुरू होने से पहले ही सपा और उसके विरोधियों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया।
समाजवादी पार्टी इस यात्रा के जरिए स्थानीय संगठन को सक्रिय करने के साथ अपने पीडीए संदेश को आगे बढ़ा रही है। वहीं भाजपा के नेता इस अभियान पर सवाल उठाते हुए सपा के पुराने शासन और उसके राजनीतिक नेतृत्व को मुद्दा बना रहे हैं। इस तरह दोनों दल अपनी-अपनी राजनीतिक व्याख्या के साथ मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
रायबरेली में सपा की मौजूदगी को देखते हुए अखिलेश यादव का कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती और हरचंदपुर से राहुल लोधी अलग-अलग सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सपा की कोशिश इन क्षेत्रों में अपने मौजूदा संगठन और सामाजिक समर्थन को मजबूत करने की है।
पीडीए की परिभाषा को लेकर दयाशंकर सिंह के सवाल के बीच यह मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है कि अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साथ जोड़ने के लिए पार्टियां किन नारों और गठजोड़ का इस्तेमाल कर रही हैं। भाजपा जहां सपा के पीडीए अभियान को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी इसे सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़ती है।
रायबरेली से शुरू हुई राजनीतिक गतिविधियों के साथ उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां और तेज होती दिखाई दे रही हैं। अखिलेश यादव पीडीए को अपनी राजनीतिक रणनीति के केंद्र में रख रहे हैं, जबकि भाजपा नेता इस रणनीति की परिभाषा और सपा की राजनीतिक विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल दयाशंकर सिंह के बयान ने अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया है। एक तरफ सपा अपने पीडीए अभियान के जरिए विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे लेकर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में पीडीए और उससे जुड़े सामाजिक समीकरणों पर दोनों दलों के बीच यह बहस जारी रहने की संभावना है