कानपुर से रक्षा उत्पादन को बढ़ावा, DMSRDE-UPTTI ने मिलाया हाथ

Update: 2026-07-11 09:38 GMT

कानपुर। रक्षा वस्त्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कानपुर से एक बड़ी पहल की गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की इकाई डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (DMSRDE) और उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान (UPTTI) के बीच पांच वर्ष के लिए समझौता ज्ञापन (MOU) किया गया है। इस समझौते के बाद रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाले विशेष फैब्रिक, सुरक्षात्मक वर्दी, स्मार्ट टेक्सटाइल और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के विकास को गति मिलेगी।

इस पहल से रक्षा वस्त्र प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास में कानपुर की भूमिका और मजबूत होगी। DMSRDE और UPTTI के विशेषज्ञ अब मिलकर अत्याधुनिक तकनीकों पर शोध करेंगे, जिससे भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों के लिए बेहतर और अधिक प्रभावी उपकरण तैयार किए जा सकेंगे।

समझौते का मुख्य उद्देश्य रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों के लिए उन्नत वस्त्र तकनीकों का विकास करना है। वर्तमान समय में सेना के जवानों के लिए ऐसी वर्दी और सुरक्षा सामग्री की जरूरत है, जो कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सके। इसी दिशा में दोनों संस्थान मिलकर हल्के, मजबूत और अत्याधुनिक कपड़ों के निर्माण पर काम करेंगे।

MOU के तहत विशेष प्रकार के फैब्रिक तैयार करने, स्मार्ट टेक्सटाइल विकसित करने और सुरक्षा उपकरणों में नई तकनीकों के इस्तेमाल पर अनुसंधान किया जाएगा। स्मार्ट टेक्सटाइल ऐसी तकनीक है जिसमें कपड़े में सेंसर और आधुनिक सुविधाओं को शामिल किया जा सकता है। इससे सैनिकों की सुरक्षा और कार्यक्षमता को बेहतर बनाया जा सकेगा।

DMSRDE लंबे समय से रक्षा सामग्री और तकनीकी विकास के क्षेत्र में काम कर रहा है। वहीं UPTTI वस्त्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाला प्रमुख संस्थान है। दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता के मेल से रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगा। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और अनुसंधान को बढ़ावा मिलने से देश में नई तकनीकों का विकास होगा और भारतीय उद्योगों को भी इसका लाभ मिलेगा।

इस साझेदारी से छात्रों और शोधकर्ताओं को भी नई संभावनाएं मिलेंगी। उन्हें रक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान कार्यों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे भविष्य में नई प्रतिभाएं तैयार होंगी। इसके अलावा उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ने से रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

कानपुर पहले से ही औद्योगिक और तकनीकी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब रक्षा वस्त्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इस नई पहल के बाद शहर की पहचान देश के महत्वपूर्ण रक्षा अनुसंधान केंद्रों में और मजबूत होगी।

DMSRDE और UPTTI के बीच हुआ यह समझौता भारत को रक्षा क्षेत्र में तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सेना के लिए बेहतर सुरक्षा उपकरण विकसित होने के साथ-साथ देश की आत्मनिर्भरता को भी नई गति मिलेगी।

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