जयपुर में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप दिल्ली पुलिस ने किया रेस्क्यू
सामूहिक दुष्कर्म का मामला
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर की एक नाबालिग के साथ जयपुर में कथित सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। नाबालिग के घर से लापता होने के बाद मामला अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गया। बाद में दिल्ली पुलिस ने किशोरी को बरामद किया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे वापस भेजने की कार्रवाई की गई। मामले में अब पुलिस उन परिस्थितियों की जांच कर रही है, जिनमें किशोरी जयपुर पहुंची और उसके साथ कथित अपराध हुआ।
नाबालिग के लापता होने के बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की थी। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद उसकी लोकेशन और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान किशोरी के उत्तर प्रदेश से बाहर होने की जानकारी सामने आई। इसी बीच दिल्ली पुलिस तक भी उससे जुड़ी सूचना पहुंची और किशोरी को सुरक्षित बरामद किया गया।
किशोरी से प्रारंभिक पूछताछ और काउंसलिंग के दौरान कथित सामूहिक दुष्कर्म की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। आरोप है कि जयपुर में उसके साथ एक से अधिक लोगों ने यौन हिंसा की। नाबालिग से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस उसकी पहचान और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों को गोपनीय रखते हुए कार्रवाई कर रही है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किशोरी सिद्धार्थनगर से जयपुर कैसे पहुंची। क्या उसे किसी ने बहला-फुसलाकर बुलाया था या किसी अन्य माध्यम से वह वहां पहुंची, इसकी जांच की जा रही है। उसके संपर्क में रहे लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
नाबालिग के बयान के आधार पर घटनास्थल की पहचान और कथित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। आवश्यकता के अनुसार संबंधित राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय कर साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं। मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी मामले की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
चूंकि कथित घटना जयपुर की बताई जा रही है, इसलिए संबंधित क्षेत्र की पुलिस की भूमिका भी अहम होगी। नाबालिग के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पॉक्सो एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की लागू धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि किन व्यक्तियों के खिलाफ कौन-सी धाराएं लगाई गई हैं, इसकी पुष्टि आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड से ही होगी।
दिल्ली पुलिस द्वारा किशोरी को बरामद किए जाने के बाद उसके परिजनों और संबंधित पुलिस को सूचना दी गई। नाबालिग से जुड़े मामलों में मेडिकल जांच, बाल कल्याण समिति के समक्ष पेशी और काउंसलिंग जैसी निर्धारित प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। कथित सामूहिक दुष्कर्म में कितने लोग शामिल थे, आरोपियों की पहचान क्या है और किशोरी किस तरह जयपुर पहुंची, इन सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित है, इसलिए उससे जुड़ी पहचान योग्य जानकारी साझा नहीं की जानी चाहिए।