यमुना डूब क्षेत्र में सीमांकन शुरू, ढाई से तीन हजार निर्माणों पर मंडराया संकट

Update: 2026-07-30 09:34 GMT

आगरा : यमुना नदी के डूब क्षेत्र को चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पिछले 100 वर्षों में आई सबसे अधिक बाढ़ के आधार पर तय किए गए डूब क्षेत्र में अब सीमांकन का काम शुरू हो गया है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की ओर से निर्धारित लेटीट्यूड और एटिट्यूड के आधार पर सिंचाई विभाग यमुना डूब क्षेत्र में मुड्डियां (सीमा चिह्न) लगाने का कार्य कर रहा है। इस कार्रवाई की जद में शहर के करीब ढाई से तीन हजार निर्माण आने की संभावना जताई जा रही है।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यमुना के वास्तविक डूब क्षेत्र की पहचान वैज्ञानिक मानकों के आधार पर की जा रही है। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग द्वारा तय किए गए तकनीकी मानकों और भौगोलिक निर्देशांकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीमांकन पूरा होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-कौन से क्षेत्र यमुना की बाढ़ सीमा के अंतर्गत आते हैं।

100 वर्षों की बाढ़ के आधार पर तय हुआ क्षेत्र

यमुना डूब क्षेत्र का निर्धारण सामान्य जलस्तर के आधार पर नहीं, बल्कि पिछले 100 वर्षों में नदी में आए अधिकतम बाढ़ स्तर को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इसका उद्देश्य भविष्य में बाढ़ की स्थिति में नदी के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र को सुरक्षित रखना है।

अधिकारियों का कहना है कि नदियों के किनारे प्राकृतिक जल प्रवाह क्षेत्र को बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि डूब क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण होते हैं तो बाढ़ के दौरान पानी का बहाव प्रभावित होता है और आसपास के क्षेत्रों में खतरा बढ़ जाता है।

मुड्डियां लगाकर किया जा रहा सीमांकन

सिंचाई विभाग की टीमों ने यमुना किनारे विभिन्न स्थानों पर सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तकनीकी सर्वे के आधार पर चिन्हित स्थानों पर मुड्डियां लगाई जा रही हैं, जिससे डूब क्षेत्र की सीमा स्पष्ट हो सके।

अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी आधार पर की जा रही है। सर्वेक्षण में आधुनिक उपकरणों और केंद्रीय जल आयोग द्वारा निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है।

हजारों निर्माणों पर असर की आशंका

डूब क्षेत्र में किए जा रहे सीमांकन के कारण शहर के ढाई से तीन हजार निर्माण प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। इनमें निजी निर्माण, व्यावसायिक गतिविधियां और अन्य ढांचे शामिल हो सकते हैं।

प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि इनमें से कितने निर्माण वैध हैं और कितने नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए हैं। सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

अवैध निर्माणों पर होगी कार्रवाई

प्रशासन का कहना है कि यमुना के प्राकृतिक क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण पर्यावरण और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। डूब क्षेत्र में नियमों के विपरीत बने निर्माणों की जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने कहा कि कार्रवाई से पहले सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। प्रभावित लोगों को भी नियमों और प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी।

बाढ़ से बचाव के लिए जरूरी कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों के डूब क्षेत्र को सुरक्षित रखना बाढ़ प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नदी के फैलाव वाले क्षेत्र में निर्माण होने से बारिश और बाढ़ के समय पानी को जगह नहीं मिलती, जिससे नुकसान बढ़ सकता है।

यमुना जैसे बड़े नदी तंत्र के लिए डूब क्षेत्र का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है।

लोगों में बढ़ी चिंता

सीमांकन शुरू होने के बाद डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि वे वर्षों से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं और अचानक होने वाली कार्रवाई से उनके सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों की स्थिति और उनके दस्तावेजों की जांच की जाए। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ाई जाएगी।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

फिलहाल सिंचाई विभाग की टीमें यमुना डूब क्षेत्र में सीमांकन का कार्य कर रही हैं। मुड्डियां लगाने के बाद तैयार रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

यमुना डूब क्षेत्र का यह सीमांकन आने वाले समय में शहर के विकास, निर्माण गतिविधियों और बाढ़ प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सर्वे पूरा होने के बाद प्रशासन किन कदमों को लागू करता है।

Tags:    

Similar News