एटा : उत्तर प्रदेश के एटा जिले में करीब 21 साल पुराने पुलिस हिरासत में युवक की मौत के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज की अदालत ने दो पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान दो अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी है। अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषी पुलिसकर्मियों को जेल भेज दिया गया।
यह मामला अगस्त 2005 का है। आरोप था कि पुलिस एक 40 वर्षीय व्यक्ति को पकड़कर थाने ले गई थी, जहां हिरासत में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। मृतक के बेटे ने कथित तौर पर अपने पिता को थाने में उल्टा लटकाकर पीटते हुए देखा था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब अदालत ने दो पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है।
अगस्त 2005 में शुरू हुआ था मामला
डीजीसी रेशपाल सिंह राठौर के मुताबिक, जैथरा थाना क्षेत्र के बहगो गांव निवासी अतिवीर सिंह ने अगस्त 2005 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि 26 अगस्त को गांव में प्रधान पद की उम्मीदवारी को लेकर विवाद के बीच कथित रूप से फायरिंग हुई थी।
इस घटना की सूचना मिलने के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष मनीष कुमार यादव और पुलिसकर्मियों की टीम गांव पहुंची। आरोप था कि पुलिस अतिवीर सिंह के भाई मौहरपाल उर्फ पप्पू को पकड़कर जैथरा थाने ले गई। परिजनों का कहना था कि पुलिस को बताया गया था कि गोलीबारी दूसरे पक्ष की ओर से हुई थी, लेकिन इसके बावजूद मौहरपाल को हिरासत में लिया गया।
बेटे ने थाने में पिता को पिटते देखा
शिकायत के अनुसार, मौहरपाल का बेटा कुलदीप सिंह शाम के समय अपने पिता के लिए खाना लेकर थाने पहुंचा था। आरोप था कि वहां उसने अपने पिता को उल्टा लटकाकर पीटते हुए देखा। उसने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी उसके पिता की बेरहमी से पिटाई कर रहे थे और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जा रही थी।
परिवार के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कुलदीप को भी धमकाया और दोबारा थाने नहीं आने को कहा। आरोप है कि इसके बाद रात में मौहरपाल की पुलिस हिरासत में मौत हो गई।
शव गायब करने का भी लगा था आरोप
मृतक के भाई अतिवीर सिंह ने आरोप लगाया था कि घटना के बाद पुलिसकर्मियों ने मौहरपाल के शव को एक निजी वाहन से कहीं ले जाकर गायब कर दिया। परिजनों ने इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों और पत्रकारों को घटना की जानकारी दी। मामला सामने आने के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई और इसकी जांच शुरू की गई।
मामले की जांच कई वर्षों तक चली। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई और सुनवाई आगे बढ़ी।
दो पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास
करीब 21 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद बुधवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं। इसके बाद जिला जज राकेश धर दुबे की अदालत ने आरोपी आरक्षी महावीर सिंह और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी गजराज सिंह को दोषी करार दिया।
अदालत ने दोनों को **आजीवन कारावास** की सजा सुनाने के साथ **25-25 हजार रुपये का अर्थदंड** लगाया। फैसले के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
दो आरोपियों की हो चुकी है मौत
इस प्रकरण में तत्कालीन थानाध्यक्ष मनीष यादव और एक अन्य आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।
दोषी करार दिए गए महावीर सिंह वर्तमान में हाथरस में तैनात बताए गए हैं, जबकि गजराज सिंह पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। करीब दो दशक से अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले ने पुलिस हिरासत में हुई मौत के इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।