उत्तर प्रदेश :  महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित और आत्मनिर्भर माहौल देने के लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। मिशन शक्ति के तहत हेल्पलाइन, महिला सहायता डेस्क, पिंक बूथ, सीसीटीवी कैमरे, पुलिस पेट्रोलिंग और जागरूकता कार्यक्रमों को एक नेटवर्क के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षा देने के साथ उन्हें अपने अधिकारों तथा शिकायत दर्ज कराने के तरीकों की जानकारी देना भी है।
महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध उनकी शिक्षा, रोजगार, आवागमन और सामाजिक भागीदारी से है। यदि किसी छात्रा को कॉलेज से लौटते समय डर लगे या नौकरीपेशा महिला देर शाम सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने में असहज महसूस करे, तो इसका असर उसके अवसरों पर पड़ता है। सुरक्षित सड़कें, बाजार, बस स्टैंड, अस्पताल और शिक्षण संस्थान महिलाओं को बिना भय के आगे बढ़ने का विश्वास देते हैं।
 जागरूकता से शिकायत का रास्ता आसान
मिशन शक्ति के अंतर्गत स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों, बाजारों और महिला समूहों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर जोर दिया जाता है। इन कार्यक्रमों में महिलाओं और लड़कियों को हेल्पलाइन नंबर, कानूनी अधिकार, साइबर सुरक्षा, घरेलू हिंसा तथा शिकायत की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाती है।
कई मामलों में पीड़ित महिलाओं को यह पता नहीं होता कि परेशानी की स्थिति में उन्हें किस विभाग या नंबर पर संपर्क करना चाहिए। जागरूकता अभियान इस दूरी को कम करने में मदद करते हैं। महिलाओं को बताया जाता है कि छेड़छाड़, पीछा करने, धमकी देने या ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी घटनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी शिकायत की जा सकती है।
 हेल्पलाइन बनी सहायता का माध्यम
विमेन पावर लाइन 1090 महिलाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए विशेष माध्यम है। इसके अलावा 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और 181 महिला हेल्पलाइन भी जरूरत के समय सहायता उपलब्ध कराने वाले महत्वपूर्ण विकल्प हैं। इन सेवाओं के कारण महिला को थाने तक पहुंचने से पहले सहायता मांगने का माध्यम मिल जाता है।
फोन कॉल, सोशल मीडिया पर उत्पीड़न, पीछा करने, धमकी और दूसरे प्रकार के परेशान करने वाले व्यवहार की शिकायत भी संबंधित प्लेटफॉर्म पर की जा सकती है। समय पर सुनवाई और कार्रवाई महिलाओं का सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा सकती है।
महिला हेल्प डेस्क से कम हुई झिझक
पुलिस थानों में स्थापित महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य शिकायतकर्ताओं को सहज वातावरण उपलब्ध कराना है। यहां महिला अपनी समस्या बता सकती है और उसे आगे की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है। इससे उन महिलाओं को विशेष सुविधा मिलती है जो थाने जाकर सामान्य व्यवस्था में शिकायत करने से झिझकती हैं।
तहसील और स्थानीय स्तर पर सहायता व्यवस्था उपलब्ध होने से सुरक्षा तंत्र महिलाओं के ज्यादा करीब पहुंचता है। शिकायत सुनने के साथ संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी पीड़िता को समय पर सहायता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
 तकनीक और पिंक बूथ से बढ़ी निगरानी
सेफ सिटी परियोजना के अंतर्गत संवेदनशील स्थानों की पहचान, सीसीटीवी निगरानी, पुलिस पेट्रोलिंग और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को महत्व दिया गया है। बाजारों, प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड और शिक्षण संस्थानों के आसपास निगरानी बढ़ने से घटनाओं को रोकने तथा आरोपियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
भीड़भाड़ और संवेदनशील इलाकों में बनाए गए पिंक बूथ महिलाओं को तत्काल सहायता मांगने का एक नजदीकी विकल्प देते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की दिखाई देने वाली मौजूदगी महिलाओं में भरोसा बढ़ाने के साथ गलत व्यवहार करने वालों पर भी दबाव बनाती है।
साइबर सुरक्षा भी बनी प्राथमिकता
महिलाओं की सुरक्षा अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, अनचाहे संदेश, तस्वीरों का दुरुपयोग और ऑनलाइन धमकी भी गंभीर चुनौतियां हैं। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को स्क्रीनशॉट, संदेश और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है।
सुरक्षित सार्वजनिक और डिजिटल वातावरण से लड़कियों की पढ़ाई, महिलाओं के रोजगार और उनकी स्वतंत्र आवाजाही को मजबूती मिल सकती है। मिशन शक्ति का व्यापक उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है, जिसमें महिलाएं सुरक्षा व्यवस्था को अपने आसपास महसूस करें और जरूरत पड़ने पर बिना झिझक सहायता मांग सकें।
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