कांवड़ यात्रा में दिखी श्रवण कुमार की झलक, बुजुर्ग महिलाओं को पालकी में ले जा रहा श्रद्धालु

बुजुर्ग महिलाओं को पालकी में ले जा रहा श्रद्धालु

Update: 2026-07-30 02:51 GMT

UTTAR-PRADESH : सावन माह और कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था, सेवा और समर्पण की कई प्रेरणादायक तस्वीरें सामने आती हैं। ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली घटना इन दिनों लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है, जहां एक कांवड़िया अपनी मां और चाची को पालकी में बैठाकर कांवड़ यात्रा कर रहा है। उसकी इस अनोखी सेवा भावना को देखकर लोग उसे आधुनिक दौर का 'श्रवण कुमार' कह रहे हैं।

यात्रा के दौरान श्रद्धालु की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। पालकी में बैठी मां और चाची के साथ वह नंगे पैर श्रद्धा के साथ यात्रा पूरी कर रहा है। रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु और स्थानीय लोग उसकी सेवा भावना की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति में माता-पिता और बुजुर्गों के सम्मान का जीवंत उदाहरण बताया।
सेवा और श्रद्धा का अनूठा संगम
बताया जा रहा है कि कांवड़िया अपनी मां और चाची की लंबे समय से इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें पालकी में बैठाकर यात्रा करा रहा है। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से दोनों महिलाओं के लिए पैदल यात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में उसने स्वयं पालकी उठाकर उन्हें यात्रा कराने का संकल्प लिया।
यात्रा के दौरान वह नियमित रूप से विश्राम करता है, दोनों की देखभाल करता है और पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ता है। इस सेवा भाव ने लोगों को भावुक कर दिया है।
लोगों ने बताया 'आज का श्रवण कुमार'
रास्ते में इस दृश्य को देखने वाले श्रद्धालुओं ने युवक की जमकर प्रशंसा की। कई लोगों का कहना है कि आज के समय में जहां अक्सर बुजुर्गों की उपेक्षा की खबरें सामने आती हैं, वहीं यह कांवड़िया अपने आचरण से समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
सोशल मीडिया पर भी लोग उसकी तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए उसे 'श्रवण कुमार कांवड़िया' की संज्ञा दे रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
कांवड़ यात्रा में दिख रही आस्था की मिसाल
हर वर्ष सावन के महीने में लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं। इस दौरान कई श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार कठिन यात्राएं पूरी करते हैं। कहीं दिव्यांग श्रद्धालु यात्रा कर रहे हैं तो कहीं परिवार के सदस्य बुजुर्गों को साथ लेकर आस्था का परिचय दे रहे हैं।
यह घटना भी बताती है कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों का भी प्रतीक है।
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में सकारात्मक संदेश देती हैं। माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा रही है और नई पीढ़ी के लिए ऐसे उदाहरण प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।
श्रद्धालु की यह यात्रा लोगों को यह संदेश भी देती है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपने माता-पिता और परिवार के बुजुर्गों की सेवा करना भी उतना ही बड़ा पुण्य माना जाता है।

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