जवाबी हलफनामा दाखिल न करने पर हाई कोर्ट नाराज कलेक्टर और एसएलएओ को किया तलब
हाई कोर्ट की सख्ती 12 साल पुराने मामले में संतकबीर नगर के अफसर तलब
संतकबीर नगर: उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर से जुड़े एक मामले में 12 साल से जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले में संतकबीर नगर के जिलाधिकारी (कलेक्टर) और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (SLAO) को तलब किया है। लंबे समय से लंबित जवाब के मामले में कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि संबंधित पक्ष की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है और यह स्थिति करीब 12 वर्षों से बनी हुई है। इतने लंबे समय तक अदालत के निर्देश के बावजूद जवाब दाखिल न होने पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी और SLAO को किया तलब
हाई कोर्ट ने संतकबीर नगर के जिलाधिकारी और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी को अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष पेश होने को कहा है। अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि जवाबी हलफनामा अब तक दाखिल क्यों नहीं किया गया और अदालत के समक्ष मामले की स्थिति स्पष्ट करने में इतनी देरी कैसे हुई।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
अदालत ने लंबे समय तक मामले को लंबित रखने को लेकर सख्त रुख अपनाया। न्यायिक प्रक्रिया में समय पर जवाब दाखिल करना महत्वपूर्ण होता है, ताकि मामले की सुनवाई आगे बढ़ सके। 12 साल तक जवाब दाखिल नहीं होने से मामले की सुनवाई प्रभावित हुई और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हुई।
भूमि अधिग्रहण से जुड़ा मामला
मामले में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी का नाम सामने आने से इसके भूमि अधिग्रहण से जुड़े होने की जानकारी है। ऐसे मामलों में मुआवजा, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और प्रशासनिक आदेशों से संबंधित विवाद अदालत तक पहुंचते हैं। कोर्ट अब संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की स्थिति और जवाब दाखिल न किए जाने का कारण जानना चाहती है।
अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश
हाई कोर्ट का अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब करना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। सामान्य तौर पर अदालत के समक्ष संबंधित अधिकारी या उनके अधिवक्ता मामले की पैरवी करते हैं, लेकिन लंबे समय तक आदेशों का अनुपालन न होने पर कोर्ट व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दे सकती है। अब अगली सुनवाई में अधिकारियों के सामने जवाब दाखिल करने और देरी की वजह स्पष्ट करने की चुनौती होगी।
लंबे समय से लंबित मामलों पर सख्ती
अदालतें लगातार इस बात पर जोर देती रही हैं कि सरकारी विभाग और अधिकारी न्यायालय के निर्देशों का समय पर पालन करें। जवाब दाखिल करने में अत्यधिक देरी से न केवल संबंधित पक्ष प्रभावित होता है, बल्कि अदालत के सामने मामले का अंतिम निपटारा भी टलता रहता है। संतकबीर नगर के इस मामले में 12 साल की देरी ने इसी मुद्दे को फिर सामने ला दिया है।
आगे क्या होगा?
अब जिलाधिकारी और SLAO को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देना होगा। उन्हें यह बताना होगा कि इतने लंबे समय तक जवाबी हलफनामा क्यों दाखिल नहीं किया गया। अगली सुनवाई में अदालत के रुख से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई अतिरिक्त निर्देश या कार्रवाई की जाती है या नहीं।