Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश। बौद्ध तीर्थ स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने खुशी जताई है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश और देशवासियों के लिए गौरव का क्षण बताया। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में मान्यता मिलना प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश की जनता की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा आज पूरी हुई है।
जयवीर सिंह ने कहा कि भगवान बुद्ध के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल सारनाथ को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में 45वें स्थान पर शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मान्यता भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि सारनाथ भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण स्थल है, जहां उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया था। इस स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से बौद्ध संस्कृति और भारत की ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि इस फैसले से उन दावों और भ्रांतियों पर भी विराम लगेगा, जिनमें भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों को लेकर अन्य देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूनेस्को की मान्यता ने सारनाथ की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को स्वीकार किया है। जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि राज्य के चार प्रमुख स्थलों को अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की पहचान एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा। मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेश और देश के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है।