विश्व पटल पर चमका सारनाथ, यूनेस्को सूची में शामिल होते ही यूपी का चौथा धरोहर स्थल बना
लखनऊ/वाराणसी : उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को (UNESCO) की प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस वैश्विक मान्यता के साथ सारनाथ अब भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है।
दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया। इस उपलब्धि को भारत की प्राचीन संस्कृति, बौद्ध परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लंबे समय से सारनाथ को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे थे। इस मान्यता के बाद प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान अब आगरा के ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूर्वांचल की ऐतिहासिक विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी।
अशोक स्तंभ और बौद्ध धरोहर को मिली वैश्विक पहचान
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल की गई सारनाथ की संपत्ति में चौखंडी स्तूप और पुरातात्विक परिसर का पूरा क्षेत्र शामिल है। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके प्रथम पांच शिष्यों के ऐतिहासिक मिलन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
सारनाथ के मुख्य पुरातात्विक परिसर में स्थित धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन बौद्ध विहारों के अवशेष और सम्राट अशोक द्वारा स्थापित प्रसिद्ध अशोक स्तंभ इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं। इन स्मारकों में प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला, बौद्ध दर्शन और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।
करीब ढाई हजार वर्षों से जीवित बौद्ध तीर्थ परंपरा और यहां मौजूद ऐतिहासिक अवशेषों को अब पूरी दुनिया की साझा विरासत के रूप में मान्यता मिल गई है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सारनाथ के विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से वाराणसी और पूर्वांचल के पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यूनेस्को की मान्यता किसी भी ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करती है। सारनाथ पहले से ही दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल रहा है, लेकिन अब इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक महत्व मिलेगा।
भारत की सांस्कृतिक विरासत में जुड़ा नया अध्याय
सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत की प्राचीन सभ्यता, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता का प्रमाण माना जा रहा है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता न केवल वाराणसी और उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय बन गई है।