खतौली (मुजफ्फरनगर)। पावन अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर खतौली नगर के श्री नेमिपार्श्व दिगंबर जैन मंदिर (जक्की वाला) और श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर (नया खतौली) में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। धार्मिक आयोजन के दौरान पूरा वातावरण जिनवाणी के जयकारों, मंत्रोच्चार और भक्तिमय संगीत से गूंज उठा।
सुबह से ही दोनों जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में धर्मावलंबियों ने मंदिर पहुंचकर भगवान जिनेन्द्र की पूजा-अर्चना की और विधान में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। आयोजन स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल भगवान जिनेन्द्र के पवित्र अभिषेक के साथ हुआ। इसके बाद विश्व शांति और जनकल्याण की भावना को लेकर शांतिधारा की गई। विधि-विधान के साथ नित्य पूजन और मंत्रोच्चार करते हुए श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं।
विधान में शामिल श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की और भगवान के समक्ष सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर पूजा करते नजर आए। इस दौरान महिलाओं, पुरुषों और बच्चों में भी धार्मिक उत्साह देखने को मिला।
आयोजकों ने बताया कि अष्टान्हिका महापर्व जैन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दौरान श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं और आत्मशुद्धि, संयम एवं आध्यात्मिक उन्नति की भावना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान भी जैन समाज का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है, जिसमें भगवान सिद्धों की आराधना की जाती है।
मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति के पदाधिकारी, जैन समाज के सदस्य और स्वयंसेवक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
श्रद्धालुओं ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करने से समाज में एकता और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है।
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। मंदिरों में दिनभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं और भक्तों ने भक्ति भाव के साथ भगवान जिनेन्द्र की आराधना की।
आयोजकों के अनुसार, आने वाले दिनों में भी विधान से जुड़े विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए जैन समाज के लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। अष्टान्हिका महापर्व के दौरान नगर का माहौल पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ है।